युद्ध की वजह से बदली एयरलाइंस की किस्मत, फिर आया बड़ा झटका
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक एयर ट्रैवल (Air Travel) के रूट्स (Routes) को काफी हद तक बदल दिया है। जैसे ही Emirates, Qatar Airways, और Etihad Airways जैसी मध्य पूर्व की एयरलाइंस को अपने एयरस्पेस (Airspace) बंद करने पड़े, पश्चिमी एयरलाइंस के लिए एशिया और अन्य क्षेत्रों के लिए अपने पुराने और मुनाफे वाले लंबे रूट्स को फिर से शुरू करने का मौका बन गया। Deutsche Lufthansa AG, British Airways (IAG का हिस्सा), और Air France-KLM जैसी यूरोपीय कंपनियों के साथ-साथ अमेरिका की United Airlines और Delta Air Lines ने भी इन रूट्स पर अपनी कैपेसिटी (Capacity) बढ़ाई।
आसमान छूते जेट फ्यूल की कीमतें बनीं सबसे बड़ी सिरदर्द
हालांकि, यह मौका एयरलाइंस के लिए एक बड़े झटके के साथ आया। सबसे बड़ी चुनौती जेट फ्यूल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है। फरवरी के अंत से जेट फ्यूल की लागत में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो कुछ मामलों में दोगुनी हो गई है और क्रूड ऑयल (Crude Oil) की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय औसत जेट फ्यूल की कीमतों में अकेले मार्च महीने में ही लगभग 20% की वृद्धि हुई। यह उछाल एयरलाइंस की सबसे बड़ी ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Cost) में से एक पर सीधा असर डाल रहा है।
हेजिंग (Hedging) भी नहीं बचा पा रही पूरी तरह
आमतौर पर, यूरोपीय एयरलाइंस अमेरिकी कंपनियों की तुलना में फ्यूल की लागत को ज्यादा हेज करती हैं, लेकिन यह सुरक्षा पूरी नहीं है। कई हेजिंग रणनीतियाँ क्रूड ऑयल की कीमतों पर आधारित होती हैं, न कि विशेष रूप से जेट फ्यूल पर। ऐसे में, एयरलाइंस को बढ़ती रिफाइनिंग कॉस्ट (Refining Cost) का सामना करना पड़ रहा है। Lufthansa ने नए फ्यूल हेजिंग को फिलहाल रोक दिया है, लेकिन 2026 तक के लिए वे सुरक्षित हैं। EasyJet जैसी कंपनियां भी बढ़ती कीमतों के असर को महसूस कर रही हैं। वहीं, United Airlines, जो शायद ही कभी हेजिंग करती है, लगातार ऊंची तेल कीमतों के लिए तैयार है। Delta Air Lines को अपनी रिफाइनरी के स्वामित्व से कुछ फायदा मिल रहा है, जिससे उन्हें लागत को मैनेज करने में मदद मिलती है।
ऑपरेशनल बदलाव और शेयर बाजार पर असर
इन बढ़ती लागतों के चलते एयरलाइंस को अपने ऑपरेशन्स (Operations) में बदलाव करने पड़ रहे हैं। Lufthansa मार्केट की अनिश्चितता को देखते हुए रूट्स में कटौती और पुराने विमानों को जल्दी रिटायर करने पर विचार कर रही है। Scandinavian Airlines पहले ही फ्यूल की ऊंची कीमतों के कारण लगभग 1,000 फ्लाइट्स रद्द कर चुकी है। इस वित्तीय दबाव का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है; IAG के शेयर्स में हाल ही में 16% से ज्यादा की गिरावट आई है।
अन्य देशों की एयरलाइंस से मुकाबला
इसके अलावा, एयरलाइंस को सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines) और कैथे पैसिफिक (Cathay Pacific) जैसी एशियाई एयरलाइंस से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जो यूरोप के लिए अधिक सीधी और सस्ती उड़ानों के लिए रूसी एयरस्पेस का उपयोग कर सकती हैं।
भविष्य की राहें अनिश्चित
इंडस्ट्री ग्रुप IATA (International Air Transport Association) भले ही मांग में लगातार वृद्धि का अनुमान लगा रहा हो, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) को लेकर चेतावनी दे रहा है। एनालिस्ट्स (Analysts) का कहना है कि भले ही ट्रैवल डिमांड (Travel Demand) मजबूत बनी हुई है, लेकिन यात्री अपनी यात्रा की जगह बदल सकते हैं, और यूरोप के भीतर की यात्राओं को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिसका लंबी दूरी की उड़ानों पर असर पड़ सकता है। यह एक जटिल स्थिति है: व्यवधानों से उत्पन्न अवसर अब बढ़ती परिचालन लागतों से ढक गए हैं। भविष्य में कैपेसिटी (Capacity) में वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि फ्यूल की कीमतें कब स्थिर होती हैं और मध्य पूर्व की एयरलाइंस कब अपने रूट्स पर लौटती हैं, जो संभवतः मार्केट शेयर (Market Share) वापस पाने के लिए आक्रामक कीमतों के साथ आएंगी। कमजोर वित्तीय स्थिति वाली या कम प्रभावी लागत नियंत्रण वाली एयरलाइंस सबसे ज्यादा जोखिम में होंगी।