Mumbai International Airport Limited (MIAL) के रीडेवलपमेंट प्लान को लेकर एयरलाइंस ने मोर्चा खोल दिया है। कंपनियां टर्मिनल रिनोवेशन से पहले स्वतंत्र स्ट्रक्चरल सेफ्टी रिपोर्ट की मांग कर रही हैं, जिसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने फिलहाल **265** इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कटौती के फैसले पर रोक लगा दी है।
विवाद की जड़ क्या है?
अडानी ग्रुप की कंपनी MIAL और एयरलाइंस के बीच विवाद का मुख्य कारण 'टर्मिनल 1' का रीडेवलपमेंट प्लान है। MIAL का प्रस्ताव था कि 265 वीकली इंटरनेशनल फ्लाइट्स के स्लॉट्स को कम किया जाए ताकि रिनोवेशन का काम सुचारू रूप से चल सके। लेकिन एयरलाइंस का कहना है कि यह फैसला बिना उचित परामर्श के लिया गया है।
एयरलाइंस की क्या है मांग?
एयरलाइन ऑपरेटर्स कमेटी ने साफ कर दिया है कि उन्हें 60 साल पुरानी टर्मिनल 1B बिल्डिंग की थर्ड-पार्टी स्ट्रक्चरल सेफ्टी असेसमेंट रिपोर्ट चाहिए। एयरलाइंस को डर है कि अचानक स्लॉट कम करने से न केवल उनका शेड्यूल बिगड़ेगा, बल्कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ेगी और ऑक्यूपेंसी रेट पर भी बुरा असर पड़ेगा।
सरकार की दखलअंदाजी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने MIAL के उस प्लान को रोक दिया है, जो अक्टूबर के अंत से लागू होने वाला था। मंत्रालय अब दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहा है ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।
नवी मुंबई एयरपोर्ट का एंगल
MIAL ने सुझाव दिया था कि एयरलाइंस कुछ ऑपरेशंस को नए 'नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट' पर शिफ्ट कर सकती हैं। हालांकि, एयरलाइंस ने इसकी लॉजिस्टिकल तैयारी और व्यावहारिकता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, सरकार की हाई-लेवल मीटिंग्स पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरलाइंस किसी ठोस सहमति पर पहुँच पाते हैं या नहीं।
