पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय एयरलाइंस को बड़ा झटका लगा है। लगभग **26,000** इंटरनेशनल फ्लाइट्स को **20 जुलाई** तक के लिए रद्द कर दिया गया है। इस वजह से एयरलाइंस को बड़े रेवेन्यू लॉस के साथ-साथ फ्यूल पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
Detailed Coverage
26,000 फ्लाइट्स पर ग्रहण!
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर भी दिखने लगा है। नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में जानकारी दी है कि 20 जुलाई तक 26,000 से ज्यादा इंटरनेशनल फ्लाइट्स को कैंसिल कर दिया गया है। यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, कई एयरस्पेस प्रतिबंधों के चलते यह बड़ा फैसला लेना पड़ा है।
परिचालन में बढ़ी मुश्किलें और जेब पर भारीThe "Dalal Street" Rule:
एयरलाइंस के लिए सिर्फ टिकट की कमाई का नुकसान ही नहीं, बल्कि ऑपरेशनल कॉस्ट में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। प्रतिबंधित इलाकों से बचने के लिए, एयरलाइंस को फ्लाइट्स के रूट बदलने पड़ रहे हैं। इससे हवाई जहाजों को ज्यादा लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिसके चलते एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की खपत बढ़ गई है। ATF एयरलाइन कंपनियों के सबसे बड़े खर्चों में से एक है।
ऐसे में, एयरलाइंस दोहरी मार झेल रही हैं। एक तरफ रद्द फ्लाइट्स से कमाई का जरिया बंद हो गया है, वहीं दूसरी तरफ जो फ्लाइट्स चल भी रही हैं, उनका खर्चा काफी बढ़ गया है। हर एयरलाइन पर इसका कुल फाइनेंशियल इम्पैक्ट (Financial Impact) उनके रूट नेटवर्क और प्रभावित एयरस्पेस पर निर्भर करेगा।
सेक्टर का मौजूदा हाल और रेगुलेटर की नजर
भारतीय एविएशन सेक्टर पहले से ही बढ़ी हुई फ्यूल प्राइसेज और कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते दबाव में था। अब इस नई अनिश्चितता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। एयरलाइंस यह भी नहीं समझ पा रही हैं कि फ्लाइट के रूट कब सामान्य होंगे।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी कर रहा है, जो यह तय करती हैं कि किन इलाकों से फ्लाइट्स का गुजरना सुरक्षित है। इन्वेस्टर्स (Investors) पर नजर रख रहे हैं कि इन मुश्किलों का एयरलाइंस के तिमाही नतीजों पर क्या असर पड़ेगा। लंबे समय तक फ्यूल-खर्चीले रूट्स पर निर्भरता इंटरनेशनल सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को कमजोर कर सकती है।
भविष्य में, एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एयरस्पेस प्रतिबंध कब तक जारी रहेंगे। एयरलाइंस अपनी लागत को कितनी जल्दी स्थिर कर पाएंगी, यह पश्चिम एशिया संकट के समाधान और DGCA व अन्य अंतरराष्ट्रीय एविएशन बॉडीज द्वारा जारी किए जाने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव पर निर्भर करेगा।
