Airbus की भारत को चेतावनी: एविएशन हब बनने की राह में इन्फ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट की कमी बड़ी बाधा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Airbus की भारत को चेतावनी: एविएशन हब बनने की राह में इन्फ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट की कमी बड़ी बाधा

Airbus ने भारत को आगाह किया है कि अगर रेगुलेटरी और इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार नहीं हुआ, तो भारत का ग्लोबल एविएशन हब बनने का सपना अधूरा रह सकता है। कंपनी भारत से अपनी सोर्सिंग को बढ़ाकर **$1.6 बिलियन** सालाना कर चुकी है, लेकिन सही इकोसिस्टम की कमी अब भी बड़ी चुनौती है।

भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की कवायद के बीच, दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी Airbus ने सख्त नसीहत दी है। Airbus India और South Asia के प्रेसिडेंट Jürgen Westermeier ने कहा कि देश में 1,200 से ज्यादा विमानों का ऑर्डर पाइपलाइन में है, लेकिन इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए फिजिकल और रेगुलेटरी ढांचे में बड़े बदलाव की जरूरत है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार क्यों जरूरी?

कंपनी का मानना है कि मिडिल ईस्ट के बड़े एविएशन हब की तरह भारत को उभरने के लिए सिर्फ नए विमानों की जरूरत नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट्स की क्षमता (throughput) और एफिशिएंसी को भी कई गुना बढ़ाना होगा। मेट्रो शहरों के एयरपोर्ट्स पर बढ़ती भीड़ लॉन्ग-हॉल उड़ानों के लिए बड़ी रुकावट बन रही है।

टाटा के साथ नई साझेदारी और मैन्युफैक्चरिंग

Airbus भारत में अपनी जड़ें मजबूत कर रही है। वर्तमान में भारत से कंपनी की सालाना प्रोक्योरमेंट $1.6 बिलियन है, जिसे 2030 तक $2 बिलियन के पार ले जाने का लक्ष्य है। इसी दिशा में Tata Advanced Systems के साथ मिलकर H125 हेलीकॉप्टर के लिए फाइनल असेंबली लाइन तैयार की जा रही है, जिससे 2027 की शुरुआत से डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है।

टैलेंट और कॉस्ट की चुनौती

ग्रोथ के बीच एयरलाइंस को स्किल्ड पायलटों और टेक्नीशियंस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस गैप को भरने के लिए Airbus भारत में 14 फुल-फ्लाईट सिमुलेटर का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा, मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधाओं को आधुनिक बनाने की भी सख्त जरूरत है ताकि भारतीय कंपनियां इंटरनेशनल लेवल पर कॉम्पिटिटिव बनी रहें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.