एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी Airbus ने भारत में डोमेस्टिक एयर ट्रैवल ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **9.3%** कर दिया है। अगले दो दशकों में भारत को **3,480** नए पैसेंजर एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी, जो भारतीय एविएशन मार्केट की तेजी को दर्शाता है।
भारत बनाम चीन: बदलती तस्वीर
Airbus की लेटेस्ट 2026-2045 ग्लोबल मार्केट फोरकास्ट के मुताबिक, भारत ग्लोबल एविएशन का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। कंपनी ने पहले जो अनुमान 8.9% लगाया था, उसे अब बढ़ाकर 9.3% कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि ठीक इसके उलट Airbus ने चीन के लिए अपने ग्रोथ फोरकास्ट को 5.4% से घटाकर 4.7% कर दिया है, जो ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के शिफ्ट होने का संकेत है।
ऑर्डर बुक और डिलीवरी का गणित
भारतीय एयरलाइंस के लिए Airbus की ऑर्डर बुक काफी मजबूत है, जिसमें अभी 1,200 से ज्यादा एयरक्राफ्ट पेंडिंग हैं। कंपनी का लक्ष्य अगले एक दशक तक भारत में हर हफ्ते औसतन 2 से ज्यादा विमान डिलीवर करने का है। यह मांग देश की बढ़ती मिडिल क्लास और एयरलाइंस द्वारा फ्लीट मॉर्डनाइजेशन के प्लान्स से आ रही है।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि सब कुछ आसान नहीं है। सप्लाय-चेन की अड़चनें अभी भी डिलीवरी टाइमलाइन पर असर डाल रही हैं। कंपनी का 2026 का टारगेट करीब 870 कमर्शियल एयरक्राफ्ट का है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग में कोई भी देरी इस आंकड़े को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों के लिए, यह सिर्फ एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग की कहानी नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में विमान आने से एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्यूल कैपेसिटी और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेक्टर में बड़े अवसर पैदा होंगे। हालांकि, भारतीय एयरलाइंस के लिए महंगा फ्यूल, कॉम्पिटिटिव फेयर और करेंसी में उतार-चढ़ाव जैसे रिस्क बने हुए हैं, जिन पर नजर रखना जरूरी है।
