Air India के लॉस का SIA पर गहरा असर
Air India द्वारा वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2025-26 में दर्ज किए गए ₹25,606 करोड़ के जबरदस्त घाटे का सीधा असर Singapore Airlines (SIA) के नतीजों पर पड़ा है। एयर इंडिया के Vistara के साथ मर्जर के बाद यह पहला पूरा वित्तीय वर्ष था, जब कंपनी ने इतना बड़ा नुकसान उठाया। इस नुकसान के कारण SIA के नेट प्रॉफिट में 57% की भारी गिरावट आई है। SIA के CEO Goh Choon Phong ने इस स्थिति के लिए कई बाहरी झटकों का जिक्र किया, लेकिन घाटे का यह स्तर Air India के लिए एक जटिल चुनौती की ओर इशारा करता है, जो बाहरी दबावों के साथ-साथ कंपनी के नए बड़े परिचालन पैमाने और उसकी कमजोरियों को भी उजागर करता है।
SIA के शेयर पर नतीजों का असर
इस तिमाही में SIA ने S$1.18 बिलियन का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के S$2.78 बिलियन से काफी कम है। इसमें Air India के S$945.2 मिलियन के नुकसान को भी शामिल किया गया है। इन बड़े वित्तीय झटकों के बावजूद, SIA का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब SGD 20.27 बिलियन है और इसका P/E रेश्यो लगभग 8.45 है। एनालिस्ट्स की राय ज्यादातर 'होल्ड' में है, और टारगेट प्राइस S$6.50 से S$7.07 के बीच है। इससे यह पता चलता है कि निवेशक SIA की ओवरऑल स्ट्रेटेजी पर भरोसा रखते हैं, जबकि उसकी भारतीय सहयोगी कंपनी की वित्तीय मुश्किलों से यह स्थिति बिलकुल अलग है।
भारतीय एयरलाइंस की तुलना
प्रतिस्पर्धी भारतीय एविएशन मार्केट Air India के लिए एक कठिन पृष्ठभूमि पेश करता है। IndiGo, जो मई 2026 तक 52% से अधिक मार्केट शेयर रखती है, ने Q3 FY26 में ₹549.8 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि यह पिछले साल की तुलना में 77% कम है, फिर भी कंपनी प्रॉफिटेबल बनी हुई है। IndiGo का बड़ा फ्लीट साइज और इंटरनेशनल रूट्स उसे रुपए में गिरावट के झटके को झेलने में मदद करते हैं। SpiceJet ने Q3 FY26 में रेवेन्यू में 77% की बढ़ोतरी दिखाई और ऑपरेशनल फायदे भी दिखाए, लेकिन पुराने लॉसेस और वर्किंग कैपिटल की कमी के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं। दूसरी ओर, Vistara के मर्जर के बाद Air India, जो 5,600 से अधिक फ्लाइट्स और 208 एयरक्राफ्ट्स के साथ काफी बड़ी हो गई है, उसे अपने लीन प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में इंडस्ट्री के झटकों का ज्यादा सामना करना पड़ रहा है।
Air India के सामने बाहरी चुनौतियां
Air India के ऑपरेशन्स को कई महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी एयरस्पेस का बंद होना, जो अप्रैल 2025 से भारतीय एयरलाइंस को प्रभावित कर रहा है और मई 2026 तक जारी है, विशेष रूप से उत्तरी अमेरिकी रूट्स पर लंबी और महंगी यात्राओं के लिए मजबूर कर रहा है। सिर्फ इस एक भू-राजनीतिक मुद्दे से भारतीय एयरलाइंस को अरबों रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा, मध्य पूर्व के संघर्षों के कारण फ्यूल की बढ़ती कीमतें और कमजोर होता भारतीय रुपया (जो मई 2026 के मध्य तक USD 95.8900 के स्तर पर पहुँच गया था) कंपनी की लागत, जैसे कि लीज और मेंटेनेंस, को बढ़ा रहा है। ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याएं भी एयरक्राफ्ट डिलीवरी और अपग्रेड में देरी कर रही हैं, जिससे क्षमता वृद्धि सीमित हो रही है। इतना ही नहीं, जून 2025 में हुए फ्लाइट 171 का घातक हादसा, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी, के बाद रेगुलेटरी जांच और सख्त नियम लागू हुए हैं, जिससे इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कमी आई है।
मर्जर की चुनौतियां और भविष्य
Vistara का इंटीग्रेशन Air India की संरचनात्मक चुनौतियों को और बढ़ा रहा है। जून 2025 में फ्लाइट 171 का हादसा, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी, परिचालन जोखिमों को उजागर करता है। शुरुआती रिपोर्टों में टेक-ऑफ के बाद फ्यूल कंट्रोल स्विच को 'कटऑफ' पोजीशन में ले जाने का संकेत मिला है, हालांकि इसका कारण मानवीय गलती थी या इलेक्ट्रिकल समस्या, इसकी जांच अभी जारी है। इस घटना ने रेगुलेटरी स्क्रूटनी को बढ़ाया है और एयरलाइन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तानी एयरस्पेस का लंबे समय तक बंद रहना एक लगातार वित्तीय बोझ है, जिसे प्रतिस्पर्धी अपनी क्षमता या लचीलेपन के दम पर बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं। पिछले साल (मई 2026 तक) भारतीय रुपए में आई 12.02% की तेज गिरावट भी विदेशी मुद्राओं में लिए गए कर्ज और लीज भुगतानों को Air India के लिए और महंगा बना रही है। IndiGo के विपरीत, जो अपनी मजबूत बाजार स्थिति और अंतरराष्ट्रीय आय का उपयोग हेजिंग के लिए करता है, Air India का मर्जर के बाद बड़ा आकार उसे आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। Vistara की खुद की लाभप्रदता हासिल करने में संघर्ष करने का इतिहास Air India के रिकवरी प्रयासों में एक और बाधा जोड़ता है।
उम्मीदें और लंबी राह
इन वित्तीय दबावों के बावजूद, Singapore Airlines और Tata Sons, Air India के दीर्घकालिक सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहे हैं। वे इसे अपनी योजनाओं का एक 'मुख्य घटक' मानते हैं। भारतीय एविएशन मार्केट में जबरदस्त वृद्धि की उम्मीद है, और यह 2026 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनने वाला है, जिसके 2034 तक 11.72% की औसत वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है। Air India अपनी विस्तारित फ्लीट और रूट्स का उपयोग करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसमें यूरोप को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फोकस के रूप में पहचाना गया है। हालांकि, Air India को अभी भी भू-राजनीतिक मुद्दों, करेंसी में उतार-चढ़ाव, जटिल इंटीग्रेशन चुनौतियों और निरंतर रेगुलेटरी निगरानी जैसी मुश्किलों से पार पाना होगा।