Air India और flydubai ने हाथ मिलाया है। इस इंटरलाइन पार्टनरशिप के तहत यात्री दुबई के जरिए एक ही टिकट पर सफर कर सकेंगे। बिना नए विमान खरीदे अपनी पहुंच बढ़ाने की यह रणनीति एयरलाइन के लिए कितनी असरदार होगी?
बिना नए विमान के विस्तार की रणनीति
एयरलाइन इंडस्ट्री में एयर इंडिया और दुबई की flydubai का यह इंटरलाइन एग्रीमेंट 16 सितंबर, 2026 से प्रभावी हो गया है। इस करार के बाद यात्रियों को अब अलग-अलग टिकट बुक करने की जरूरत नहीं होगी। यात्री एक ही टिकट पर दोनों एयरलाइन्स की सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे और उनका सामान सीधे डेस्टिनेशन तक पहुंच जाएगा।
इस साझेदारी के जरिए एयर इंडिया का नेटवर्क यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के 80 से ज्यादा नए डेस्टिनेशंस तक बढ़ गया है। वहीं, flydubai को बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे और जयपुर जैसे भारतीय शहरों में अपनी पहुंच और मजबूत करने का मौका मिलेगा। इसी के साथ flydubai ने Uzbekistan Airways के साथ भी ऐसा ही समझौता किया है।
घाटे के दौर में 'एसेट-लाइट' दांव
एविएशन सेक्टर में नई उड़ानें शुरू करना या नए विमान खरीदना बेहद महंगा सौदा है। इस 'एसेट-लाइट' मॉडल के जरिए एयर इंडिया अपना कर्ज बढ़ाए बिना रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, चुनौतियां अभी भी बड़ी हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में एयर इंडिया का घाटा ₹22,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है, जो निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
क्या ये पार्टनरशिप मुनाफे में बदलेगी?
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical instability) है। मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ने पर अक्सर एयरलाइन्स को अपना रूट बदलना पड़ता है, जिससे फ्यूल का खर्च काफी बढ़ जाता है।
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस नई पार्टनरशिप से कंपनी का 'पैसेंजर लोड फैक्टर' कितना बढ़ता है और क्या यह साझेदारी एयर इंडिया के मार्जिन में सुधार लाने में कारगर साबित होगी।
