Air India में टेक्नीकल गड़बड़ियों का यह चौंकाने वाला इजाफा उसके महत्वाकांक्षी बिलियन-डॉलर 'Vihaan.AI' ट्रांसफॉर्मेशन प्लान के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है। कंपनी ने 470 नए एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि मेंटेनेंस और प्रोसीजरल लैप्स (procedural lapses) जैसी गहरी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। इन खराबी में 4 गुना की बढ़ोतरी साफ तौर पर ऑपरेशनल डिसिप्लिन (operational discipline) की बुनियादी चुनौतियों को उजागर करती है।
बढ़ता ऑपरेशनल दबाव
आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में प्रति 1,000 फ्लाइट्स पर 1.09 टेक्नीकल इंसिडेंट (technical incident) दर्ज किए गए। यह दिसंबर 2024 के 0.26 प्रति 1,000 फ्लाइट्स के आंकड़े से काफी ज्यादा है। इस अवधि में 17,500 से अधिक उड़ानों में कुल 23 घटनाएं सामने आईं, जिनमें से कम से कम 21 की औपचारिक जांच जरूरी थी। ये समस्याएं इंजन स्टॉल वार्निंग, फ्लाइट कंट्रोल मालफंक्शन, हाइड्रोलिक्स की गड़बड़ी और फ्यूल या इंजन ऑयल लीक जैसी गंभीर थीं, जो एयरबस (Airbus) और बोइंग (Boeing) दोनों तरह के एयरक्राफ्ट में देखी गईं। इसके अलावा, रिजेक्टेड टेकऑफ (rejected takeoffs) की घटनाएं भी महीने-दर-महीने दोगुनी हो गईं, हालांकि हाल ही में इनमें कुछ कमी आई है।
कंपटीटर्स से बड़ा अंतर और रेगुलेटरी जांच
यह बढ़त ऐसे समय में आई है जब भारत के डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की निगरानी भी काफी कड़ी है। DGCA ने 2024 और 2025 के बीच एयरलाइंस को 352 शो कॉज नोटिस जारी किए और 139 मामलों में पेनल्टी लगाई। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, जांचे गए Air India के 82.5% एयरक्राफ्ट में बार-बार टेक्नीकल डिफेक्ट्स (recurring technical defects) पाए गए, जबकि मार्केट लीडर IndiGo के केवल 36.5% एयरक्राफ्ट में ऐसी समस्याएं हैं। IndiGo का ऑन-टाइम परफॉरमेंस (OTP) 90.6% और पैसेंजर लोड फैक्टर (PLF) 91.0% है, जो Air India ग्रुप के 84.5% OTP से काफी बेहतर है। यह बड़ा अंतर दिखाता है कि कैसे एयर इंडिया के नए एयरक्राफ्ट खरीदने और उन्हें बेहतर बनाने के प्रयासों को ऑपरेशनल इनएफिशिएंसीज (operational inefficiencies) के कारण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति का असर प्रमुख स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) पर भी दिख रहा है; Air India में 25.1% हिस्सेदारी रखने वाली Singapore Airlines का नेट प्रॉफिट लगभग 68% गिर गया, जिसका एक बड़ा कारण Air India के घाटे को बताया गया है।
सुरक्षा और वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल
लगातार हो रही टेक्नीकल गड़बड़ियां एयर इंडिया के अंदरूनी सिस्टमिक कमजोरियों (systemic weaknesses) की ओर इशारा करती हैं। जून 2025 से पहले के छह महीनों में, एयरलाइन को सेफ्टी वायलेशंस (safety violations) के लिए 13 नोटिस मिले थे। पहले की जांचों में यह भी सामने आया था कि एयरक्राफ्ट बिना वैध एयरवर्थीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (airworthiness review certificate) के उड़ाया जा रहा था, और मेंटेनेंस इंजीनियर्स (maintenance engineers) सेफ्टी प्रोटोकॉल (safety protocols) और डिफेक्ट रिपोर्ट (defect reports) को नजरअंदाज कर रहे थे। यह पैटर्न एयरलाइन की पुरानी सुरक्षा चिंताओं की याद दिलाता है। इन सबके बीच, एयर इंडिया ग्रुप ने फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में ₹10,859 करोड़ का कंसोलिडेटेड लॉस (consolidated loss) दर्ज किया, जबकि IndiGo ने इसी दौरान ₹2,176 करोड़ का नेट प्रॉफिट (net profit) कमाया। हाल ही में एकीकृत हुई Vistara ने भी FY25 में ₹3,890.2 करोड़ का घाटा दिखाया। ये फाइनेंशियल और ऑपरेशनल दबाव कंपनी के टर्नअराउंड प्लान की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
भविष्य का नजरिया
इन चुनौतियों के बावजूद, एयर इंडिया अपनी पांच साल की 'Vihaan.AI' योजना पर कायम है, जिसमें फ्लीट मॉडर्नाइजेशन (fleet modernization) और डिजिटल कैपेबिलिटीज़ (digital capabilities) में बड़ा निवेश शामिल है। 67 एयरक्राफ्ट के लिए 400 मिलियन डॉलर का अपग्रेडेशन भी जारी है। हालांकि, हालिया टेक्नीकल इंसिडेंट्स में आई तेजी बताती है कि अभी भी बड़े हर्डल्स (hurdles) मौजूद हैं। भारत का एविएशन मार्केट (aviation market) तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन Air India को इस ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अपनी ऑपरेशनल रिलायबिलिटी (operational reliability) और सेफ्टी कल्चर (safety culture) की बुनियादी समस्याओं को तुरंत ठीक करना होगा, वरना इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस (investor confidence) और रिवाइवल प्लान्स (revival plans) पर असर पड़ना तय है।