गर्मियों में उड़ानों पर ब्रेक
Air India इस बार नॉर्दर्न समर 2026 के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या काफी कम कर रही है। कंपनी अगस्त तक उत्तरी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में कई उड़ानों को सस्पेंड कर रही है या उनकी फ्रीक्वेंसी घटा रही है। यह कटौती ऐसे समय पर आई है जब आमतौर पर एयरलाइन के लिए कमाई का सबसे बड़ा सीजन होता है। अप्रैल 2026 में ही एयरलाइन की अंतरराष्ट्रीय कैपेसिटी पिछले साल की तुलना में 22% घट गई थी, जहां 1,987 फ्लाइट्स ऑपरेट हुईं, जबकि पिछले साल यह संख्या 2,549 थी। इस तिमाही में भी यह गिरावट जारी रहने की उम्मीद है। दिल्ली-शिकागो और दिल्ली-नेवार्क जैसे रूट्स को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि मुंबई-न्यूयॉर्क JFK, दिल्ली-शंघाई पुडोंग और सिंगापुर व दक्षिण पूर्व एशिया के कई अन्य रूट्स पर उड़ानों में कमी की गई है या उन्हें रोक दिया गया है।
फ्यूल की ऊंची कीमतें और तनाव बने वजह
इन उड़ानों में कटौती का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लागत में हुई वृद्धि है। ATF अब एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस का लगभग 60% हो गया है, जो सामान्य तौर पर 40% के आसपास रहता था। इसके अलावा, पाकिस्तान के एयरस्पेस ब्लॉक के कारण भी भारतीय एयरलाइंस पर दबाव बना हुआ है। इस वजह से, खासकर दिल्ली से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है और ज्यादा फ्यूल खर्च होता है। पश्चिम एशिया और हॉरमूज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव ने भी बाजार में अस्थिरता पैदा की है, जिसके चलते 13 मई 2026 तक ब्रेंट क्रूड $106.95 प्रति बैरल और WTI $101.52 के आसपास ट्रेड कर रहा था।
भारी नुकसान से जूझ रही एयर इंडिया
इन ऑपरेशनल चुनौतियों के बीच Air India Group भारी फाइनेंशियल दबाव का सामना कर रही है। 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को ₹22,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ था, कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह आंकड़ा ₹220 बिलियन (लगभग $2.3 बिलियन) तक पहुंच गया। यह वित्तीय दबाव तब है जब एयरलाइन अपग्रेडेशन में निवेश भी कर रही है। पूरा भारतीय एविएशन सेक्टर भी मुश्किल में है। ICRA का अनुमान है कि 2026 फाइनेंशियल ईयर में इंडस्ट्री-व्यापी नेट लॉस ₹17,000-₹18,000 करोड़ के बीच रहेगा और सेक्टर का आउटलुक नेगेटिव बना हुआ है। डोमेस्टिक फ्लाइट्स में मामूली बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन मई 2026 में अंतरराष्ट्रीय कैपेसिटी **10.5%**गिरी है।
प्रतिद्वंदियों के बढ़ते कदम और टर्नअराउंड पर सवाल
लंबी दूरी के रूट्स पर Air India की इतनी बड़ी कटौती टाटा ग्रुप के तहत इसकी टर्नअराउंड स्ट्रेटेजी पर सवाल खड़े करती है। यह कदम प्रतिद्वंदियों, जैसे IndiGo, के बढ़ते परिचालन से बिल्कुल अलग है, जो अपने बेड़े को ऑप्टिमाइज कर रहा है और अपने डोमेस्टिक नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। ऊंची फ्यूल कॉस्ट और जियोपॉलिटिकल ब्लॉकएड के कारण लंबी उड़ान पथों के चलते Air India के लिए लॉन्ग-हॉल रूट्स अब अनप्रॉफिटेबल साबित हो रहे हैं, जो इसकी स्ट्रक्चरल समस्याओं को उजागर करता है। इसके अलावा, एयरलाइन ने 2023 से अब तक कथित तौर पर 1,000 से अधिक कर्मचारियों को एथिकल उल्लंघनों के कारण निकाला है। वहीं, भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.81 ट्रिलियन है और इसका पी/ई रेश्यो लगभग 56 है। SpiceJet को 'Sell' रेटिंग मिली हुई है। IndiGo एशिया और खाड़ी देशों में भी अपने ऑपरेशंस बढ़ा रहा है। पाकिस्तान के एयरस्पेस का बंद रहना भारतीय एयरलाइंस के लिए हर महीने सैकड़ों करोड़ का अतिरिक्त खर्च और फ्लाइट टाइम में बढ़ोतरी का सबब बना हुआ है।
मुश्किलों भरा भविष्य
वैश्विक ऑयल कीमतों में अस्थिरता और लगातार बने भू-राजनीतिक जोखिमों के साथ, Air India के अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस का भविष्य अनिश्चित लग रहा है। एयरलाइन को भारी ऑपरेशनल कॉस्ट और अपने बड़े डेट बर्डन को मैनेज करना होगा। हालांकि भारतीय एविएशन मार्केट के बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन Air India का रास्ता काफी हद तक उसके बड़े वाइडबॉडी फ्लीट और जटिल भू-राजनीतिक स्थिति के बीच, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने पर निर्भर करेगा।
