फ्यूल की मार, उड़ानें बंद
जेट फ्यूल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण Air India अपनी 100 दैनिक उड़ानों को रद्द कर रही है, जो उसके कुल शेड्यूल का करीब 10% है। यह कदम जून से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे रूट्स पर सबसे ज्यादा असर डालेगा। एयरलाइन मैनेजमेंट का कहना है कि मौजूदा ऑपरेशनल कॉस्ट्स निकलना मुश्किल हो गया है और यदि ईंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आगे और भी उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं। हाल ही में, जेट फ्यूल की औसत कीमत में 80% का उछाल आया है, जो बढ़कर $179.46 प्रति बैरल हो गई है, जबकि फरवरी के अंत में यह $99.40 थी। अब जेट फ्यूल एयरलाइन के ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस का 40% तक पहुंच गया है, जिससे मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और टिकटों के दाम बढ़ रहे हैं। दिल्ली में तो जेट फ्यूल की कीमत मार्च के बाद से दोगुनी हो गई है।
लंबे रूट्स और बढ़ी मुश्किलें
Federation of Indian Airlines (FIA) ने सरकार से तत्काल राहत की गुहार लगाई है, चेतावनी दी है कि अगर मदद नहीं मिली तो सेवाएं निलंबित करनी पड़ सकती हैं। जहां सरकार ने घरेलू जेट फ्यूल पर कुछ टैक्स कम किए हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कोई राहत नहीं मिली है। वैश्विक स्तर पर, एविएशन इंडस्ट्री 2026 तक $41 बिलियन के नेट प्रॉफिट पर स्थिर होने का अनुमान लगा रही है, लेकिन यह 3.9% के मामूली नेट प्रॉफिट मार्जिन पर होगा। इसके अलावा, सप्लाई चेन की दिक्कतें, भू-राजनीतिक तनाव के चलते हवाई क्षेत्र का बंद रहना और नियामक बाधाएं भी बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए, पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने की वजह से Air India और अन्य एयरलाइंस को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबे और ज्यादा फ्यूल खपत वाले रूट लेने पड़ रहे हैं। इन रूट्स पर अक्सर वियना या स्टॉकहोम जैसे शहरों में महंगे स्टॉपओवर की जरूरत पड़ती है। अकेले इस वजह से उड़ानों का समय चार घंटे तक बढ़ सकता है और ऑपरेशनल कॉस्ट्स काफी ज्यादा हो जाती हैं। 2019 में ऐसे ही एक हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय एयरलाइंस को ₹700 करोड़ का नुकसान हुआ था। वहीं, इस मुश्किल दौर में भी मार्केट लीडर IndiGo ने FY25 में ₹7,587.5 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स दर्ज किया, जबकि SpiceJet को इसी अवधि में ₹58.1 करोड़ का घाटा हुआ।
पुराने घाटे का बोझ
Air India की मौजूदा दिक्कतें उसके पुराने वित्तीय संकट से और भी बढ़ गई हैं। FY26 तक कंपनी का कुल संचित घाटा ₹20,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। 2022 में Tata Group द्वारा अधिग्रहण से पहले भी यह एयरलाइन अरबों डॉलर के घाटे और ₹426 अरब के भारी कर्ज में डूबी थी। Tata Group ने ₹15,300 करोड़ का कर्ज अपने सिर लिया था। FY24-25 में Tata Sons और Singapore Airlines से ₹9,500 करोड़ से अधिक की पूंजी निवेश के बावजूद, एयरलाइन का घाटा कम नहीं हो रहा है। अनुमान है कि Tata Group की सभी एयरलाइंस मिलकर FY25 में ₹9,568.4 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा दर्ज करेंगी। यहां तक कि Tata Sons की 31 सहायक कंपनियां घाटे में चल रही हैं और FY25 में कंपनी पर कुल कर्ज बढ़कर ₹3.46 लाख करोड़ हो गया है। FIA ने सरकार से ATF पर 11% एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटाने, 'क्रैक बैंड' प्राइसिंग मैकेनिज्म को फिर से लागू करने और VAT घटाने जैसे कदम उठाने की मांग की है। हालांकि, भारत में 11% एक्साइज ड्यूटी और राज्य VAT के चलते एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) दुनिया के सबसे महंगे ईंधनों में से एक है, जो दुबई और सिंगापुर जैसे हब से 70-80% तक महंगा पड़ता है।
भारतीय एविएशन का मुश्किल आउटलुक
भले ही वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री 2026 तक स्थिर मुनाफा कमाने की उम्मीद कर रही हो, भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए आउटलुक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जिस पर ICRA ने अपनी रेटिंग को नकारात्मक कर दिया है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, कमजोर रुपया और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं प्रमुख चिंताएं हैं। Air India का FY26 के लिए ₹20,000 करोड़ से अधिक का अनुमानित घाटा, हालिया बड़े पूंजी निवेश के बावजूद, आगे की राह की मुश्किलों को साफ दर्शाता है।
