Air India: ईंधन की बढ़ती कीमतों से फ्लाइट्स में भारी कटौती, **22%** डोमेस्टिक उड़ानें रद्द

TRANSPORTATION
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AuthorNeha Patil|Published at:
Air India: ईंधन की बढ़ती कीमतों से फ्लाइट्स में भारी कटौती, **22%** डोमेस्टिक उड़ानें रद्द
Overview

Air India अपने डोमेस्टिक फ्लाइट शेड्यूल में **22%** तक की कटौती कर रहा है। यह फैसला अगस्त 2026 तक लागू रहेगा। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी अपना कैश बर्न कम करना चाहती है। ATF अब ऑपरेटिंग खर्चों का **55%** से **60%** हो गया है। टाटा के स्वामित्व वाली यह एयरलाइन फिलहाल विस्तार से ज्यादा ऑपरेशन्स को स्थिर करने पर ध्यान दे रही है, खासकर रिकॉर्ड सालाना नुकसान और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता व करेंसी में गिरावट के बीच।

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डोमेस्टिक नेटवर्क में कटौती

Air India अगले समर सीजन, जो अगस्त 2026 तक चलेगा, के लिए अपने डोमेस्टिक फ्लाइट शेड्यूल में लगभग 22% की कटौती कर रहा है। इसका मतलब है कि एयरलाइन अपनी सामान्य 3,600 डोमेस्टिक साप्ताहिक उड़ानों में से लगभग 800 उड़ानें कम कर देगी। इससे पहले, एयरलाइन ने लंबी दूरी की उड़ानों को बेहतर बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में 27% की कटौती की थी। Air India का कहना है कि ये कटौती अस्थायी हैं और इनका उद्देश्य मौजूदा मांग और परिचालन परिस्थितियों के आधार पर क्षमता को एडजस्ट करना है।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें एविएशन सेक्टर को झटका

एयरलाइन का यह फैसला भारत के एविएशन सेक्टर पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को दिखाता है। डोमेस्टिक एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) अब ऑपरेटिंग लागत का 55% से 60% है, जो सामान्य 30% से 40% की तुलना में काफी ज्यादा है। मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया ईंधन, रखरखाव और एयरक्राफ्ट लीज के खर्चों को बढ़ा रहा है। कुछ प्रतिस्पर्धियों के विपरीत जो फ्यूल की कीमतों को हेज (hedge) करते हैं, भारतीय एयरलाइंस बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। Air India के FY26 के लिए अनुमानित रिकॉर्ड ₹27,000 करोड़ के सालाना नुकसान को देखते हुए, इसका मैनेजमेंट फ्लाइट बेड़े के विस्तार की बजाय सर्वाइवल और कैश फ्लो को प्राथमिकता दे रहा है।

इंटीग्रेशन और ऑपरेशन्स में चुनौतियां

बड़े पैमाने पर फ्लाइट बेड़े के विस्तार की योजना और 2022 में टाटा संस द्वारा अधिग्रहण के बावजूद, Air India को महत्वपूर्ण वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Vistara का Air India ग्रुप में इंटीग्रेशन ऐसे मुश्किल दौर में हो रहा है, जब इंडस्ट्री उच्च ब्याज दरों और बाजार की उथल-पुथल से जूझ रही है। आलोचकों का कहना है कि एयरलाइन के लगातार घाटे से बड़े टाटा समूह पर दबाव पड़ सकता है, जिससे बोर्ड फंडिंग को लेकर चिंतित है। इसके अलावा, मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण लंबी और अधिक ईंधन-खपत वाली उड़ानें लेनी पड़ रही हैं, जिससे लागत बढ़ रही है जिसे केवल किराया बढ़ाकर कवर नहीं किया जा सकता।

प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और भविष्य की राह

IndiGo जैसी अन्य प्रमुख एयरलाइंस भी अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए क्षमता में लगभग 7% की कटौती कर रही हैं। Air India की बड़ी कटौती इसकी विशेष भेद्यता को दर्शाती है, खासकर उन अंतर्राष्ट्रीय मार्गों के संबंध में जो हवाई क्षेत्र के मुद्दों से प्रभावित हैं। एयरलाइन अभी भी अपने A320 और वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट की रेट्रोफिटिंग सहित अपने बेड़े को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। हालांकि, लाभप्रदता बाहरी कारकों पर निर्भर हो सकती है, जैसे कि ATF की कीमतों के लिए सरकारी समर्थन और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव में कमी। जब तक ईंधन की कीमतें कम नहीं होतीं, तब तक नकदी के बहिर्वाह (cash outflow) का प्रबंधन Air India की विकास पहलों की तुलना में उसकी मुख्य प्राथमिकता बना रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.