Air India में नए CEO की तलाश में हो रही देरी के बीच, कंपनी का कामकाज संभालने के लिए टाटा संस के चेयरमैन N Chandrasekaran की अगुवाई में एक अंतरिम कमेटी का गठन किया गया है। एयरलाइन ने हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2026 में अपने रेवेन्यू को दोगुना करने के बावजूद **₹27,800 करोड़** के भारी नुकसान की रिपोर्ट दी है। यह बदलाव तब आया है जब कंपनी विस्तारा के मर्जर के बाद ऊंचे फ्यूल कॉस्ट और जटिल ऑपरेशनल चुनौतियों से निपट रही है।
नेतृत्व और ऑपरेशनल ज़िम्मेदारी
नए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के पद पर नियुक्ति में अप्रत्याशित देरी के चलते Air India अपने टॉप मैनेजमेंट में फेरबदल कर रही है। टाटा संस ने एयरलाइन को मुश्किल ऑपरेशनल दौर और मुनाफे में वापस लाने के प्रयासों के दौरान मार्गदर्शन देने के लिए एक अंतरिम मैनेजमेंट कमेटी स्थापित की है। इस कमेटी में टाटा संस के चेयरमैन N Chandrasekaran और पूर्व एयर इंडिया चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप सिंह खरولا शामिल हैं।
इस पैनल का गठन संभावित नियुक्ति को लेकर आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच हुआ है, जिसमें मौजूदा चीफ कमर्शियल ऑफिसर Nipun Aggarwal का नाम भी शामिल था, जो सितंबर में रिटायर होने वाले CEO Campbell Wilson की जगह लेने वाले थे। अंतरिम कमेटी का लक्ष्य स्थिरता प्रदान करना है। नेतृत्व के अलावा, कमेटी से ऑपरेशनल क्वालिटी और डिसिप्लिन में सुधार की उम्मीद की जा रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब एयरलाइन विस्तारा के साथ अपने नेटवर्क के इंटीग्रेशन के बाद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के दबाव में है।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस और पूंजी की ज़रूरतें
फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक के वित्तीय रिपोर्ट एयरलाइन के सामने मौजूद महत्वपूर्ण चुनौतियों को उजागर करती हैं। हालांकि कंपनी ने मर्जर के चलते ₹77,800 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया, लेकिन टैक्स के बाद उसका घाटा ₹27,800 करोड़ तक पहुंच गया। इस वित्तीय प्रदर्शन ने टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड स्तर पर चर्चाओं को जन्म दिया है, जहां इन घाटे की स्थिरता पर चिंता जताई गई है। ऑपरेशन्स और ग्रोथ प्लान्स को बनाए रखने के लिए, एयरलाइन को अपने प्रमोटरों, जिसमें सह-मालिक सिंगापुर एयरलाइंस और टाटा ग्रुप शामिल हैं, से अतिरिक्त पूंजी निवेश की आवश्यकता पड़ी है।
लाभप्रदता को प्रभावित करने वाले बाहरी कारक
बाहरी दबावों ने लाभप्रदता का मार्ग और कठिन बना दिया है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें एक प्रमुख लागत चिंता बनी हुई हैं। इसके अतिरिक्त, प्रमुख हवाई मार्गों के बंद होने से एयरलाइन को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबी उड़ानें संचालित करनी पड़ रही हैं। इन बढ़ी हुई यात्राओं से ईंधन की खपत और क्रू की लागत में वृद्धि हुई है, जिसके कारण एयरलाइन को अपने शेड्यूल में 350 से अधिक दैनिक उड़ानों में कटौती करनी पड़ी है। सप्लाई चेन की समस्याएं, जिनके कारण विमानों की डिलीवरी में देरी हुई है, लंबी अवधि की क्षमता योजना को और जटिल बना रही हैं।
बेड़े का विस्तार और भविष्य के संकेत
इन चुनौतियों के बावजूद, एयरलाइन अपने बेड़े का विस्तार कर रही है। Air India फाइनेंशियल ईयर 2027 में सात वाइड-बॉडी विमान प्राप्त करने वाली है, जबकि इसकी लो-कॉस्ट सहायक कंपनी Air India Express को लगभग 10 बोइंग 737 मैक्स विमान प्राप्त होंगे। कंपनी वर्तमान में इन बेड़े की जरूरतों को संभावित डिलीवरी स्थगन के लिए दंड के जोखिम के मुकाबले संतुलित कर रही है। निवेशक और हितधारक संभवतः कमेटी की ऑपरेशनल लागतों को स्थिर करने, इंटीग्रेशन से संबंधित खर्चों को प्रबंधित करने और आने वाली तिमाहियों में एयरलाइन के बॉटम लाइन में सुधार करने की क्षमता पर नजर रखेंगे।
