Air India ने अपने टर्नअराउंड प्लान को रफ्तार देने के लिए शेयरहोल्डर्स Tata Sons और Singapore Airlines से **$1.5 बिलियन** की इक्विटी पूंजी की मांग की है। यह कदम फाइनेंशियल ईयर **2026** में हुए **₹22,238 करोड़** के बड़े नुकसान के बाद उठाया गया है।
भारी नुकसान के पीछे की वजह
फाइनेंशियल ईयर 2026 एयर इंडिया और उसकी सब्सिडियरी Air India Express के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कंपनी को ₹22,238 करोड़ का घाटा हुआ है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा है। यह घाटा मुख्य रूप से टाटा ग्रुप द्वारा 2021 में अधिग्रहण के बाद फ्लीट के आधुनिकीकरण और नई तकनीक में किए गए भारी निवेश के कारण हुआ है।
आधुनिकीकरण का भारी खर्च
जुटाए जाने वाले फंड का इस्तेमाल एयरलाइन के पुराने फ्लीट को बदलने और पुरानी टेक्नोलॉजी सिस्टम को अपग्रेड करने में होगा। एक प्रतिस्पर्धी ग्लोबल एयरलाइन बनने के लिए कंपनी नए विमान खरीदने के साथ-साथ सॉफ्टवेयर, कॉरपोरेट कल्चर और ऑपरेशनल प्रोसेस को सुधारने पर भी बड़ी रकम खर्च कर रही है।
बाहरी चुनौतियों का दबाव
मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइन का पूर्ण टर्नअराउंड एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें एक दशक तक का समय लग सकता है। इसमें सबसे बड़ी बाधा पाकिस्तानी एयरस्पेस का बंद होना है, जिससे उत्तरी अमेरिका और मिडिल ईस्ट की उड़ानों का रास्ता लंबा हो गया है। इसके चलते फ्यूल की खपत और ऑपरेटिंग खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव ने भी लॉन्ग-हॉल कनेक्टिविटी के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि एयरलाइन अपनी इस फाइनेंशियल जरूरत और आधुनिकीकरण के लक्ष्यों के बीच संतुलन कैसे बिठाती है।
