Air India: पहली तिमाही में घाटा बढ़कर हुआ ₹6,000 करोड़ के पार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Air India: पहली तिमाही में घाटा बढ़कर हुआ ₹6,000 करोड़ के पार

Air India Group के लिए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹6,000 करोड़** हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले दोगुना है।

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में एयर इंडिया ग्रुप का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है। कंपनी ने ₹6,000 करोड़ से अधिक का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह घाटा ₹3,000 करोड़ था। आपको याद दिला दें कि पिछला फाइनेंशियल ईयर भी कंपनी के लिए काफी मुश्किल भरा था, जिसमें उसे ₹22,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा था।

घाटे की बड़ी वजहें

एयर इंडिया के मुनाफे पर सबसे बड़ी मार महंगे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की पड़ रही है, जो कुल ऑपरेटिंग खर्च का आधे से ज्यादा हिस्सा है। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण लंबी दूरी की उड़ानों के रूट बदलने पड़े हैं। नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के लिए फ्लाइट्स का लंबा होना फ्यूल की खपत और क्रू मैनेजमेंट को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। मैनेजमेंट का मानना है कि इन नेविगेशन बाधाओं से कंपनी पर सालाना ₹4,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। साथ ही, करेंसी में उतार-चढ़ाव से डॉलर में होने वाले खर्च—जैसे लीज रेंट और मेंटेनेंस—महंगे हो गए हैं।

मैनेजमेंट का 'कॉस्ट-कटिंग' प्लान

इस संकट से निपटने के लिए कंपनी एक टास्क फोर्स के जरिए अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगा रही है। इसके अलावा, एयर इंडिया और Air India Express के एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज को एकीकृत (integrate) किया जा रहा है, ताकि ओवरलैपिंग डिपार्टमेंट्स की दक्षता बढ़ाई जा सके।

निवेशकों के लिए सबक

हालांकि Air India एक लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन इसका प्रदर्शन पूरे एविएशन सेक्टर का हाल बयां करता है। InterGlobe Aviation (IndiGo) जैसे लिस्टेड प्लेयर्स के लिए यह एक संकेत है कि इंडस्ट्री में लागत का दबाव कितना ज्यादा है। अगर बड़े प्लेयर्स पर दबाव बढ़ता है, तो भविष्य में टिकट की कीमतों में बदलाव या कैपेसिटी को लेकर कंपनियां कोई कड़ा फैसला ले सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.