एयर इंडिया पर बड़ी वित्तीय मार, टर्नअराउंड की कोशिशों को झटका
एयर इंडिया के लिए यह एक गंभीर मोड़ है। Tata ग्रुप की महत्वाकांक्षी रिवाइवल स्ट्रैटेजी पर इसके अभूतपूर्व वित्तीय नुकसान का गहरा असर पड़ा है। एयरलाइन का FY26 का घाटा ₹27,000 करोड़ रहा, जो इसके 94 साल के इतिहास में सबसे ज़्यादा है। यह आंकड़े एयरलाइन की गहरी समस्याओं को उजागर करते हैं और इसके टर्नअराउंड की उम्मीदों पर पानी फेरते हैं। साथ ही, इसे फिर से पटरी पर लाने के लिए ज़रूरी बड़ी पूंजी निवेश पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वित्तीय खाई और बढ़ती मुश्किलें
FY26 के नतीजे एयर इंडिया के लिए बेहद चिंताजनक हैं। एयरलाइन ने ₹80,000 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹18,000 करोड़ का कैश बर्न दर्ज किया, यानी हर दिन लगभग ₹70 करोड़ का घाटा। अकेले Air India Express का घाटा ₹4,000 करोड़ से ज़्यादा रहा। बाहरी कारणों ने इस घाटे को और बढ़ाया, जैसे AI171 बोइंग 787 क्रू इंसिडेंट (₹5,000 करोड़ से ज़्यादा), पाकिस्तान एयरस्पेस बैन (₹5,000 करोड़), और नए लेबर कोड्स (₹1,000-₹1,500 करोड़)। अनुमान है कि हर महीने ₹2,000 करोड़ का घाटा जारी रह सकता है, जिससे Tata टेकओवर के बाद 5 साल में कुल घाटा ₹80,000 करोड़ ($9.6 बिलियन) तक पहुँच सकता है।
फंडिंग और कर्ज़ का बोझ
लगातार बढ़ते घाटे के चलते और अधिक वित्तीय मदद की ज़रूरत पड़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Tata ग्रुप और Singapore Airlines मिलकर ₹15,000-₹20,000 करोड़ के और निवेश की तलाश में हैं। वहीं, संचालन को बनाए रखने के लिए Air India द्वारा आक्रामक तरीके से लिए गए कर्ज़ के कारण इसका डेट लेवल ₹40,000-₹50,000 करोड़ तक पहुँच गया है, जो इसके प्राइवटाइजेशन से पहले के डेट के करीब है। इस लीवरेज्ड वित्तीय ढांचे के कारण एयरलाइन लंबे समय तक घाटे में रहने के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो गई है, जिसका नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो 30% बताया जा रहा है।
लीडरशिप और ऑपरेशनल समस्याएं
टर्नअराउंड की कोशिशों में लीडरशिप में बदलाव और ऑपरेशनल चुनौतियां भी बाधा डाल रही हैं। CEO Campbell Wilson का चार साल के कार्यकाल के बाद सिंगापुर लौटने की इच्छा जताना बढ़ते दबाव की ओर इशारा करता है। अंदरूनी तौर पर, विभिन्न एयरलाइन एंटिटीज और बाहरी अधिकारियों के इंटीग्रेशन से उत्पन्न हुए कल्चरल क्लैश्स भी तनाव पैदा कर रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एयरलाइन के कोर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को सरकार ने प्राइवटाइजेशन के बाद भी अपने पास रखा है, जिसके चलते बार-बार एयरक्राफ्ट-ऑन-ग्राउंड (AOG) की स्थिति बन रही है। इससे शेड्यूल बाधित हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है। नए एयरक्राफ्ट्स में भी अप्रत्याशित समस्याएं देखी गई हैं, और IndiGo जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ऑन-टाइम परफॉरमेंस में Air India पिछड़ रही है। हाल ही में रेगुलेटरी जांच में एयर इंडिया के इंजीनियरिंग प्रोसेस में मेंटेनेंस की चूक और रिकॉर्ड रखने में कमियों का भी खुलासा हुआ है।
कॉम्पिटिशन और स्ट्रैटेजिक अस्पष्टता
Air India की स्ट्रैटेजिक दिशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। एयरलाइन इस दुविधा में है कि वह एक फुल-सर्विस कैरियर बने या एक प्रीमियम ग्लोबल एयरलाइन। यह अस्पष्टता तब और बढ़ जाती है जब कॉम्पिटिटर IndiGo, जिसका अगस्त 2025 तक 64.2% डोमेस्टिक मार्केट शेयर है, अपनी पेशकशों को बढ़ाकर Air India की इंटरनेशनल महत्वाकांक्षाओं को चुनौती दे रहा है। हालांकि Tata ग्रुप ने फ्लीट अपग्रेड और 'Vihaan.AI' इनिशिएटिव के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बेहतर बनाने जैसे सुधार किए हैं, लेकिन बुनियादी वित्तीय और ऑपरेशनल मुद्दे एक बड़ी लॉन्ग-टर्म चुनौती बने हुए हैं।
कर्ज़ और ऑपरेशनल कमजोरी का इतिहास
Air India का इतिहास वित्तीय संकट और ऑपरेशनल अकुशलता से भरा रहा है, जो Tata टेकओवर से भी पहले का है। दशकों से घाटे, गलत समय पर हुए मर्जर और एयरक्राफ्ट खरीद के कारण एयरलाइन पर भारी कर्ज़ जमा हो गया था, जो जनवरी 2020 तक लगभग $8.4 बिलियन था। प्राइवटाइजेशन प्रक्रिया में भी बड़े कर्ज़ का बोझ शामिल था, जब 2021 में Tata Sons ने Air India Limited का ₹153 बिलियन (US$2.07 बिलियन) का कर्ज़ संभाला था। सरकार द्वारा इंजीनियरिंग डिवीजन को अपने पास रखना, और कई एयरलाइंस के मर्जर के बाद डेटा माइग्रेशन में समस्याएं, लगातार तकनीकी गड़बड़ियों और सुरक्षा चिंताओं का कारण बन रही हैं। 25.1% हिस्सेदारी वाली Singapore Airlines ने इस वेंचर की लंबी अवधि को स्वीकार किया है, लेकिन Air India का घाटा SIA की अपनी लाभप्रदता को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है, जिससे FY26 में SIA के नेट प्रॉफिट में 57.4% की गिरावट आई है। Singapore Airlines ने भले ही ऑपरेशन्स को मज़बूत करने के लिए एग्जीक्यूटिव्स भेजे हों, लेकिन ये क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से Air India की कमजोर कड़ियाँ रहे हैं।
भविष्य की राह
मौजूदा वित्तीय उथल-पुथल के बावजूद, Tata ग्रुप और Singapore Airlines, Air India के परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इसे एक लंबी अवधि के स्ट्रैटेजिक निवेश के रूप में देख रहे हैं। Singapore Airlines के CEO Goh Choon Phong ने इस प्रतिबद्धता को दोहराते हुए टर्नअराउंड को एक "लॉन्ग गेम" बताया है। एयरलाइन ग्रुप ने बढ़ती लागतों और एयरस्पेस प्रतिबंधों के बीच नेटवर्क की स्थिरता में सुधार के लिए जून से अगस्त 2026 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अस्थायी रूप से कम करने और निलंबित करने की योजना की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी टर्नअराउंड की सफलता गहरी ऑपरेशनल और वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ एक प्रतिस्पर्धी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानन बाजार को नेविगेट करने पर निर्भर करती है।
