Air India: 18 महीनों में बेड़े में शामिल होंगी 60 नई उड़ानें, कंपनी की बड़ी योजना

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Air India: 18 महीनों में बेड़े में शामिल होंगी 60 नई उड़ानें, कंपनी की बड़ी योजना

Air India Group अगले डेढ़ साल में अपने बेड़े में 50 से 60 नए विमान जोड़ने की तैयारी में है। यह कदम कंपनी की फ्लीट रिन्यूअल (Fleet Renewal) रणनीति का हिस्सा है। इस डिलीवरी शेड्यूल का मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन की देरी के बावजूद नेटवर्क का विस्तार करना है।

बेड़े का विस्तार और डिलीवरी की समय-सीमा

Air India Group अपनी फ्लीट को आधुनिक बनाने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। मैनेजमेंट ने पुष्टि की है कि अगले 18 महीनों में कंपनी के संचालन में 50 से 60 नए विमान शामिल होने की उम्मीद है। यह विस्तार Tata Group द्वारा 2022 की शुरुआत में अधिग्रहण किए गए एयरलाइन के फ्लीट (Fleet) और नेटवर्क को पूरी तरह से बदलने की एक बड़ी, दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

एयरलाइन के पास वर्तमान में लगभग 600 विमानों का एक महत्वपूर्ण ऑर्डर बुक (Order Book) है, जिनकी डिलीवरी 2030 के मध्य तक जारी रहेगी। कंपनी को अगले सात से आठ वर्षों तक सालाना वाइड-बॉडी (Wide-body) और नैरो-बॉडी (Narrow-body) जेट विमानों का मिश्रण मिलने की उम्मीद है। विस्तार योजना महत्वपूर्ण होने के बावजूद, कंपनी ने स्वीकार किया है कि सप्लाई चेन में बाधाओं और भू-राजनीतिक तनावों सहित वैश्विक कारकों के कारण विमानों की डिलीवरी और पुराने विमानों की रेट्रोफिटिंग (Retrofitting) में कुछ देरी हुई है। इन लॉजिस्टिक बाधाओं के बावजूद, एयरलाइन नए Boeing MAX 8 विमानों को अपनी सेवा में एकीकृत करना जारी रखे हुए है।

नेटवर्क रणनीति और परिचालन संदर्भ

Air India वर्तमान में अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, और मध्य पूर्व के लिए सेवाएं पूर्व-कटौती स्तरों के 90% तक ठीक हो गई हैं। अमेरिका और यूरोप के लिए मार्ग भी काफी हद तक फिर से चालू हो गए हैं। साथ ही, समूह अपनी सहायक कंपनी Air India Express के लिए फ्लीट हार्मोनाइजेशन (Fleet Harmonization) पर काम कर रहा है, जिसके मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। नए जेट विमानों के अधिग्रहण के अलावा, कंपनी अपने बढ़ते बेड़े की विश्वसनीयता और सुरक्षा में सुधार के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधाओं में भी निवेश कर रही है।

प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले कारक

भारत में एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और वैश्विक आर्थिक स्थितियों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। नए विमानों पर बढ़ा हुआ खर्च और रेट्रोफिटिंग और सिस्टम अपग्रेड की संबंधित लागतें परिचालन नकदी प्रवाह (Operational Cash Flow) पर दबाव डालती हैं। निवेशकों के लिए, एयरलाइन की इन भारी पूंजी निवेशों को यात्री मांग और सीट ऑक्यूपेंसी रेट (Seat Occupancy Rate) के साथ संतुलित करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण निगरानी योग्य कारक होगी। इसके अतिरिक्त, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ कंपनी जिस प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है, उसे बनाए रखने के लिए शेष ऑर्डर बुक की सफल और समय पर डिलीवरी आवश्यक है। कंपनी के अगले कदम संभवतः उसके रेट्रोफिटिंग समय-सीमा के कार्यान्वयन और लंबी दूरी की उड़ान ऑक्यूपेंसी की निरंतर रिकवरी पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.