उड़ानों में कटौती से किराए बढ़ने की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइन अपने स्टैंडअलोन ऑपरेशंस में 15-20% तक की कटौती पर विचार कर रही है, जिससे पूरे Air India Group में प्रतिदिन 100 से अधिक फ्लाइट्स कम हो सकती हैं। यह कदम Financial Year 2026 के लिए ₹22,000 करोड़ के बड़े नुकसान के बाद उठाया जा रहा है। एयरलाइन पर लगातार बढ़ते एविएशन फ्यूल की कीमतें और मध्य पूर्व व पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र जैसे भू-राजनीतिक मुद्दों से उत्पन्न व्यवधानों का गहरा असर पड़ा है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना नुकसान है।
उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में इस कमी से खासकर पीक ट्रैवल सीजन में उपलब्धता कम हो जाएगी। इसी साल की शुरुआत में डोमेस्टिक एयरफेयर कैप हटा दिए गए थे। अगले समर शेड्यूल में साप्ताहिक लगभग 3,000 डोमेस्टिक फ्लाइट्स कम होने की योजना है, जो 12% की कमी है। इसके चलते डोमेस्टिक एयरफेट्स में पहले ही 43% (2024 की पहली छमाही बनाम 2019) की भारी बढ़ोतरी देखी जा चुकी है। Air India की यह योजना इस ट्रेंड को और बढ़ा सकती है, जिससे हवाई यात्रा अधिक महंगी हो जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सबसे ज्यादा कटौती संभव
अंतरराष्ट्रीय रूटों पर सबसे ज्यादा कटौती की उम्मीद है। बढ़ती ईंधन लागत, लंबी फ्लाइट टाइमिंग और यूरोप व उत्तरी अमेरिका जैसे लंबे सफर के लिए क्रू कॉस्ट के कारण इन रूट्स पर एयरलाइंस कम प्रॉफिटेबिलिटी से जूझ रही हैं। हालांकि एयरलाइन इसे 'नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन' कह रही है, पर यह लागत दबाव के कारण अपनी महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं को कम करने का संकेत देता है। इन कटौतियों पर अंतिम फैसला मई की शुरुआत में होने वाली बोर्ड मीटिंग के बाद लिया जाएगा।
प्रतिस्पर्धियों को मिल सकता है फायदा
Air India की यह ऑपरेशनल कटौती ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय एविएशन सेक्टर एक चुनौतीपूर्ण बाजार का सामना कर रहा है। ICRA ने भू-राजनीतिक मुद्दे, गिरती करेंसी और बढ़ती ईंधन लागत को मुख्य चिंताओं के रूप में बताते हुए इंडस्ट्री के लिए एक सतर्क आउटलुक जारी किया है। मार्केट शेयर के 60% से अधिक पर काबिज IndiGo, जिसकी P/E रेशियो 39.6 से 55.92 के बीच है, एक मजबूत वित्तीय स्थिति और कुशल ऑपरेशन के साथ इस गैप का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। वहीं, SpiceJet गंभीर वित्तीय संकट में है, जबकि Akasa Air अभी ग्रोथ स्टेज में है। Tata Group और Singapore Airlines द्वारा अधिग्रहण के बाद बड़े नुकसान के बावजूद, Air India का संघर्ष इंडस्ट्री-व्यापी लागत दबावों को उजागर करता है।
लगातार घाटा और नेतृत्व संबंधी चिंताएं
Tata Group के नियंत्रण में होने के बावजूद Air India की लगातार मुनाफा कमाने की क्षमता एक बड़ी चिंता बनी हुई है। FY26 के रिकॉर्ड नुकसान, CEO Campbell Wilson के इस्तीफे की घोषणा, और हालिया सुरक्षा ऑडिट में खराब रेटिंग, एयरलाइन के टर्नअराउंड प्रयासों को और जटिल बना रही है। कंपनी ने बड़े निवेश के बावजूद ग्राहक अनुभव या टिकट राजस्व को बेहतर बनाने में संघर्ष किया है। शेयरधारकों, Tata Group और Singapore Airlines से फंड की निरंतर आवश्यकता दर्शाती है कि इसका बैलेंस शीट अभी भी बाहरी समर्थन पर अधिक निर्भर है, बजाय इसके कि यह अपने ऑपरेशंस से लाभ कमाए।
भविष्य काOutlook: उच्च लागत और बाजार की चुनौतियां
हालांकि भारतीय एविएशन मार्केट के 2034 तक USD 45.59 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, वर्तमान बाजार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैश्विक संघर्षों से प्रेरित हाई जेट फ्यूल प्राइस और कमजोर पड़ती करेंसी एयरलाइंस के मुनाफे को लगातार निचोड़ रही हैं। जबकि सरकारी हस्तक्षेप ने डोमेस्टिक एयरलाइंस को फ्यूल प्राइस वृद्धि के पूर्ण प्रभाव से कुछ हद तक बचाया है, अंतरराष्ट्रीय रूटों को बढ़ती लागतों का पूरा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। Air India की आगामी बोर्ड मीटिंग एयरलाइन के भविष्य के मार्ग को तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
