Air India, जो अब Tata Group का हिस्सा है, ने इस लॉयल्टी प्रोग्राम का नवीनीकरण (overhaul) अपने कॉम्पिटिटिव स्टेटस को मज़बूत करने और भारत के तेज़ी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में अपनी मार्केट हिस्सेदारी (market share) बढ़ाने के लिए किया है। डोमेस्टिक इकोनॉमी सेगमेंट में रिवॉर्ड फ्लाइट्स और अपग्रेड्स के लिए ज़रूरी पॉइंट्स में लगभग 30% की कटौती करके, एयरलाइन का लक्ष्य मेंबर एंगेजमेंट और बुकिंग्स को बढ़ावा देना है। यह कदम प्रतिस्पर्धियों जैसे IndiGo के 6E Rewards या Vistara के Club Vistara के मुकाबले प्रोग्राम को ज़्यादा आकर्षक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नए स्ट्रक्चर के तहत, डोमेस्टिक अवॉयड टिकट्स अब महज़ 1,500 पॉइंट्स से शुरू होंगे। इंटरनेशनल रिवॉर्ड्स के लिए, यूरोप के लिए वन-वे टिकट 35,000 पॉइंट्स से, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए 40,000 पॉइंट्स से, और कनाडा के लिए 50,000 पॉइंट्स से शुरू होंगे। इन कटौतियों का मक़सद डिमांड बढ़ाना है, हालांकि कुछ रूट्स पर पॉइंट्स की ज़रूरत बढ़ भी सकती है। इसके अलावा, एलीट स्टेटस पाने के लिए अब कम फ्लाइट्स की ज़रूरत होगी, जिससे ज़्यादा ग्राहक लॉयल कस्टमर बेस का हिस्सा बन सकेंगे। पॉइंट्स की तेज़ी से क्रेडिटिंग (सिर्फ दो घंटे के अंदर) भी मेंबर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाएगी।
Air India की यह स्ट्रैटेजी भारत में बढ़ती ट्रैवल डिमांड के बीच आई है। बजट एयरलाइन्स जैसे IndiGo जहां कीमत के दम पर ज़्यादा पैसेंजर खींचती हैं, वहीं Air India अपने बढ़े हुए बेड़े और नेटवर्क का इस्तेमाल करके वैल्यू प्रपोज़िशन को बेहतर बना रही है। Vistara, जो Tata की ही एक और एयरलाइन है, प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करती है। Air India का यह कदम इंडिगो के मास-मार्केट अपील को चुनौती देने और साथ ही अपने प्रीमियम ग्राहकों को बनाए रखने की एक डबल-प्रॉन्गड अप्रोच को दर्शाता है।
हालांकि रिवॉर्ड पॉइंट्स में कटौती को एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हैं। पॉइंट्स की बड़ी कटौती से Air India की ऑपरेशनल कैपेसिटी पर दबाव पड़ सकता है और इन्वेंटरी मैनेजमेंट पर ध्यान देना होगा। कैंसलेशन और रीशेड्यूलिंग फी के नए स्ट्रक्चर, भले ही फ्लेक्सिबिलिटी देते हों, पर अगर स्पष्टता से कम्युनिकेट न किए गए तो मेंबर्स के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। Tata ग्रुप के तहत एयरलाइन के एकीकरण (integration) को देखते हुए, इस लॉयल्टी प्रोग्राम के सुचारू कार्यान्वयन (flawless execution) बेहद ज़रूरी है।
Air India के इस नए 'महाराजा क्लब' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एयरलाइन मेंबर एंगेजमेंट को लोड फैक्टर और एंसिलरी रेवेन्यू में कैसे बदल पाती है। मैनेजमेंट का फोकस ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन और नए नियमों, खासकर कैंसलेशन पॉलिसीज़ को लेकर स्पष्ट कम्युनिकेशन पर रहेगा। उम्मीद है कि यह प्रोग्राम कस्टमर लॉयल्टी को मज़बूत करेगा और Air India को भारतीय एविएशन मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद करेगा।