बड़ी मुश्किल में एयर इंडिया, फिर भी खोल रही लग्ज़री लाउंज!
सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट (San Francisco International Airport) पर 3,300 स्क्वायर फीट का नया महाराजा लाउंज, ट्रांस-पैसिफिक मार्केट में अपनी प्रीमियम सर्विस दिखाने की एक बड़ी चाल है। यह फैसिलिटी टाटा ग्रुप (Tata Group) के पांच साल के 'Vihaan.AI' प्रोग्राम के तहत किए जा रहे बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य एयरलाइन को सालों की अनदेखी के बाद मॉडर्नाइज करना है। जहाँ एक तरफ एयरलाइन मार्केट शेयर वापस पाने के लिए ब्रांडिंग और सर्विस सुधारने पर ज़ोर दे रही है, वहीं उसकी फाइनेंशियल हेल्थ बेहद नाज़ुक बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए घाटा करीब $2.8 अरब तक पहुंच गया है।
असलियत क्या है?
इंडिगो (IndiGo) जैसी एयरलाइंस के विपरीत, एयर इंडिया एक मुश्किल ट्रांसिशन के दौर से गुज़र रही है। कंपनी एक साथ अपने पुराने जहाज़ों को अपग्रेड कर रही है, नए जहाज़ जोड़ रही है, और विस्तारा (Vistara) के साथ मर्जर के बाद ऑपरेशन्स को इंटीग्रेट कर रही है। ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें और कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन में एयरस्पेस की पाबंदियां इन कोशिशों में रुकावट डाल रही हैं। इन जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स की वजह से फ्लाइट्स ज़्यादा लंबी हो रही हैं, जिससे फ्यूल और क्रू का खर्च बढ़ रहा है। यही एयर इंडिया के प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट की मुख्य वजहें हैं।
स्ट्रक्चरल रिस्क
एयर इंडिया के लिए सबसे बड़ा रिस्क है कि वह एक अस्थिर इकोनॉमी के दौरान तेजी से एक्सपैंड कर रही है। कंपनी अपनी सेफ्टी और ऑपरेशनल परफॉरमेंस को लेकर जांच के दायरे में है। सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines) जैसे हितधारक टर्नअराउंड प्लान की व्यवहार्यता पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। टाटा ग्रुप (Tata Group) के प्राइवेट एंटिटी के तौर पर, एयर इंडिया में पब्लिक मार्केट जैसी ट्रांसपेरेंसी और डिसिप्लिन की कमी है। 600 जहाज़ों के बड़े ऑर्डर के लिए कर्ज पर इसकी भारी निर्भरता, साथ ही जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें, इसे कोई गलती न करने की गुंजाइश नहीं देतीं। अगर 'Vihaan.AI' प्रोग्राम, कैपिटल खत्म होने से पहले उम्मीद के मुताबिक नेटवर्क एफिशिएंसी नहीं दे पाया, तो एयरलाइन को लंबे समय तक इंसॉल्वेंसी का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए टाटा से और सपोर्ट की ज़रूरत होगी।
आगे क्या?
2027 तक प्रॉफिट में आना इस बात पर निर्भर करेगा कि एयर इंडिया अपने नेटवर्क को स्टेबल कर पाती है और फ्लीट मॉडर्नाइजेशन के ज़रिए स्केल हासिल कर पाती है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि नए वाइड-बॉडी जेट्स और एक मजबूत ग्लोबल सेल्स नेटवर्क इसमें मदद करेंगे। हालांकि, यह आउटलुक फ्यूल की स्टेबल कीमतों और बंद एयरस्पेस से ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटीज़ में कमी पर निर्भर करता है। फिलहाल, एयर इंडिया की स्ट्रेटेजी टाटा ब्रांड की इज़्ज़त पर बड़ी लॉस को एब्जॉर्ब करने पर टिकी है, जबकि वह ग्लोबली कॉम्पिटिटिव ऑपरेशन बनाने की कोशिश कर रही है।
