Air India के बोर्ड ने अपने HR, फाइनेंस और IT जैसे मुख्य विभागों को अपनी बजट एयरलाइन Air India Express के साथ जोड़ने की मंजूरी दे दी है। FY2026 में **₹22,238 करोड़** के नेट लॉस के बाद कंपनी यह बड़ा कदम उठा रही है ताकि कामकाज में तालमेल बिठाकर खर्चों में कटौती की जा सके।
अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए Air India ने ऑपरेशनल ढांचे में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। एयरलाइन ने अपने फुल-सर्विस करियर Air India और बजट आर्म Air India Express के बीच बैक-एंड एडमिनिस्ट्रेटिव फंक्शन जैसे कि एचआर (HR), फाइनेंस, आईटी (IT) और इंजीनियरिंग को एक साथ लाने की मंजूरी दी है। टाटा ग्रुप की यह रणनीति कामकाज में दोहराव को खत्म करने और लागत को कम करने की दिशा में एक अहम कदम है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह फैसला हालिया चुनौतीपूर्ण फाइनेंशियल ईयर के बाद लिया गया है। FY2026 में ग्रुप का कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹22,238 करोड़ रहा, जबकि कुल रेवेन्यू लगभग ₹71,870 करोड़ था। अगर अलग-अलग नजर डालें, तो Air India को ₹15,368 करोड़ और Air India Express को ₹6,767 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमरियम (Tewolde Gebremariam) के नेतृत्व में अब ग्रुप 'Internal Synergy' पर जोर दे रहा है ताकि सभी इकाइयां अलग-अलग काम करने के बजाय एक यूनिट की तरह काम करें।
आगे की चुनौतियां
हालांकि बैक-एंड सिस्टम का विलय हो रहा है, लेकिन दोनों एयरलाइंस के ब्रांड अपनी अलग पहचान बनाए रखेंगे। एयरलाइन ने उम्मीद जताई है कि अगले 6 महीनों में यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। निवेशकों के लिए असली परीक्षा इसका क्रियान्वयन है, क्योंकि एयरलाइन इंटीग्रेशन में अक्सर तकनीकी दिक्कतें या सर्विस में रुकावट जैसी चुनौतियां आती हैं। साथ ही, IndiGo जैसे मजबूत प्रतिस्पर्धियों के बीच मार्जिन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। आने वाले कुछ क्वार्टर यह तय करेंगे कि क्या यह इंटीग्रेशन कंपनी के बैलेंस शीट को सुधारने में मददगार साबित होता है या नहीं।
