Air India Pilot Drug Tests: Phuket फ्लाइट हादसे के बाद एयरलाइन का बड़ा फैसला

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AuthorMehul Desai|Published at:
Air India Pilot Drug Tests: Phuket फ्लाइट हादसे के बाद एयरलाइन का बड़ा फैसला

एयर इंडिया (Air India) ने हाल ही में फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट में हुई गंभीर घटना के बाद अपने सभी पायलट्स के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच को अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला 13 अगस्त 2026 से लागू होगा। यह कदम तब उठाया गया है जब फ्लाइट के कमांडर-इन-चीफ कथित तौर पर मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाए गए थे। यह डेवलपमेंट एयरलाइन के लिए बड़ी वित्तीय चुनौतियों के बीच आया है, क्योंकि कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026 में **₹22,238 करोड़** का भारी नेट लॉस दर्ज किया है।

पायलट्स के लिए नई पॉलिसी

एयर इंडिया ने अपने सभी पायलट्स के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों की अनिवार्य जांच का नया नियम लागू किया है, जो 13 अगस्त 2026 से प्रभावी है। यह नया आंतरिक नियम डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा निर्धारित मौजूदा रैंडम टेस्टिंग की आवश्यकताओं से कहीं आगे जाता है।

फुकेत फ्लाइट में क्या हुआ था?

यह निर्णय 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भर रही फ्लाइट AI 2379 में हुई एक गंभीर सुरक्षा घटना के बाद लिया गया है। इस फ्लाइट में अचानक 300 फीट की ऊंचाई कम हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 24 लोग घायल हो गए थे, जिनमें 20 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य शामिल थे।

जांच का दायरा

एयरलाइन का सुरक्षा निगरानी को कड़ा करने का यह कदम ऐसे समय में आया है जब जांचकर्ता उस उड़ान के कमांडर-इन-चीफ के प्रदर्शन की जांच कर रहे हैं। आधिकारिक रिपोर्टों से पता चलता है कि घटना के बाद की गई पुष्टिकरण जांच में पायलट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाया गया था। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) वर्तमान में फ्लाइट की तकनीकी खामियों की जांच कर रहा है, जिसमें कथित हाइड्रोलिक और ऑटोपायलट सिस्टम की चेतावनी भी शामिल है। इस जांच में एयरबस (Airbus) और फ्रांस के ब्यूरो ऑफ एन्क्वायरी एंड एनालिसिस फॉर सिविल सेफ्टी इन एविएशन (BEA) से तकनीकी सहायता ली जा रही है।

वित्तीय स्थिति पर एक नजर

यह घटना एयरलाइन को जबरदस्त रेगुलेटरी और सार्वजनिक दबाव में डालती है। हालांकि एयर इंडिया वर्तमान में टाटा संस (Tata Sons) की एक अनलिस्टेड सहायक कंपनी है और सीधे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ट्रेड नहीं करती है, यह डेवलपमेंट व्यापक एविएशन सेक्टर को प्रभावित करता है और ऑपरेशनल ओवरसाइट पर सवाल खड़े करता है। एयरलाइन एक जटिल, दीर्घकालिक टर्नअराउंड प्रयास के बीच में है, लेकिन हाल के वित्तीय नतीजे इस चुनौती के पैमाने को दर्शाते हैं। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए, एयर इंडिया और इसकी लो-कॉस्ट आर्म, एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express), ने संयुक्त रूप से ₹22,238 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है।

आगे की राह

हितधारकों (stakeholders) और रेगुलेटर का ध्यान इस बात पर बना हुआ है कि एयरलाइन इन बार-बार होने वाली सुरक्षा और परिचालन चिंताओं का प्रबंधन कैसे करती है। एयरलाइन महत्वपूर्ण फ्लीट विस्तार और सेवा सुधारों को जनता का विश्वास बहाल करने की आवश्यकता के साथ संतुलित कर रही है। निवेशकों और उद्योग पर्यवेक्षकों द्वारा भविष्य की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्टों, चल रही जांच के एयरलाइन के लाइसेंस और परिचालन क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव, और कंपनी द्वारा पुनर्गठन चरण से गुजरते हुए किसी भी अन्य नेतृत्व या शासन परिवर्तन की निगरानी की संभावना है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.