Air India Pilot Salary Hike: कर्मचारियों को रोकने के लिए कंपनी का बड़ा दांव, **8-15%** तक बढ़ाई सैलरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Air India Pilot Salary Hike: कर्मचारियों को रोकने के लिए कंपनी का बड़ा दांव, **8-15%** तक बढ़ाई सैलरी

Air India और Air India Express अपने पायलट्स की सैलरी में **8% से 15%** तक का इजाफा कर रही हैं। इस कदम का मकसद IndiGo और मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के पास जा रहे कर्मचारियों को रोकना है। यह सैलरी बढ़ोतरी, जो कि फ्लीट एक्सपेंशन की तैयारी के बीच आई है, कंपनी के लिए लागत का बोझ बढ़ाएगी, जिसने FY26 में **₹22,238 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया था।

कर्मचारियों को रोकने की रणनीति

Air India और उसकी लो-कॉस्ट सब्सिडियरी Air India Express ने अपने पायलट्स के लिए नया कॉम्पेनसेशन फ्रेमवर्क लागू किया है, जिसमें सैलरी 8% से 15% तक बढ़ाई गई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कॉकपिट क्रू की कमी को दूर करना है, क्योंकि कई पायलट्स IndiGo और मिडिल ईस्ट की विदेशी एयरलाइंस का रुख कर रहे हैं।

फ्लीट एक्सपेंशन और करियर ग्रोथ

यह बढ़ी हुई सैलरी, कंपनी की बड़ी फ्लीट एक्सपेंशन योजना का हिस्सा है, खासकर नई Boeing 737 फ्लीट के आने की तैयारी में। कंपनी ने स्टाफ को लुभाने के लिए खास Boeing 737 फ्लीट अलाउंस और ट्रांसफर बोनस की भी शुरुआत की है। एक नई करियर प्रोग्रेशन पॉलिसी के तहत, फर्स्ट ऑफिसर्स को लो-कॉस्ट यूनिट में कमांड ट्रेनिंग लेनी होगी, जिसके बाद वे मुख्य Air India फ्लीट के वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट पर जा सकेंगे। इस ग्रुप में सिनियरिटी पूल को एक करने से कर्मचारियों को प्रोफेशनल ग्रोथ का स्पष्ट रास्ता मिलेगा, जिससे एयरलाइन ग्रुप बाहरी प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा आकर्षक बन सके।

बढ़ती लागत का बोझ

यह सैलरी हाइक ऐसे समय में आई है जब एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पहले से ही कमजोर है। Air India ने 2026 फाइनेंशियल ईयर में ₹22,238 करोड़ का भारी नेट लॉस दर्ज किया था। बढ़ी हुई लेबर कॉस्ट एयरलाइन के खर्चों में और इजाफा करेगी, जबकि वह फ्लीट एक्सपेंशन, सिस्टम मॉडर्नाइजेशन और रीस्ट्रक्चरिंग पर पहले से ही काफी पैसा खर्च कर रही है। टाटा संस के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने पहले ही कहा है कि एयरलाइन का ट्रांसफॉर्मेशन एक लंबा सफर है, जिसमें लगभग पांच से दस साल लग सकते हैं।

पायलट्स में असंतोष?

सैलरी में बढ़ोतरी का मकसद रिटेंशन बढ़ाना है, लेकिन इसने पायलट कम्युनिटी में कुछ असंतोष भी पैदा किया है। एक बड़ा मुद्दा यह है कि पे-कैलकुलेशन अब एक्चुअल फ्लाइंग टाइम के बजाय पब्लिश्ड ब्लॉक टाइम पर आधारित होगा। कुछ पायलट्स को चिंता है कि इससे उनकी कुल कमाई कम हो सकती है, खासकर व्यस्त मेट्रो रूट्स पर जहां कंजेशन के कारण असली फ्लाइट का समय शेड्यूल ब्लॉक टाइम से ज्यादा होता है।

आगे की चुनौतियाँ

लेबर कॉस्ट के अलावा, एयरलाइन को कई और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि कुछ रीजन्स में एयरस्पेस प्रतिबंध और ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याएँ। निवेशकों और एविएशन सेक्टर के एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या मानव संसाधन पर किया गया यह अतिरिक्त खर्च पायलट टर्नओवर को प्रभावी ढंग से कम कर पाएगा या बढ़ती फिक्स्ड कॉस्ट कंपनी को प्रॉफिटेबिलिटी की ओर ले जाने में और देरी करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.