फ्यूल की कीमतें आसमान पर, एयर इंडिया पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जेट फ्यूल की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों में लगभग दोगुनी होकर $195.19 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं, जो फरवरी के अंत में $99.40 थी। यह तेज़ी एयरलाइंस के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि जेट फ्यूल आम तौर पर उनके कुल खर्च का 40% से 45% होता है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते यह स्थिति और बिगड़ी है, जिससे एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस पर लागत बढ़ाने का दबाव आ गया है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए नए सरचार्ज
इस बढ़ती लागत को संभालने के लिए, एयर इंडिया 8 अप्रैल, 2026 से प्रभावी, अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर नए फ्यूल सरचार्ज लागू कर रही है। घरेलू उड़ानों के लिए, कंपनी दूरी-आधारित प्रणाली अपना रही है, जिसमें सरचार्ज ₹299 से लेकर ₹899 तक होगा। यह फैसला सरकार द्वारा घरेलू जेट फ्यूल मूल्य वृद्धि पर लगाई गई सीमा के बाद आया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए, जहाँ फ्यूल की कीमतें अनियंत्रित हैं, एयर इंडिया क्षेत्र-विशिष्ट सरचार्ज लागू कर रही है। ये सरचार्ज पड़ोसी सार्क देशों के लिए $24 से लेकर उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे दूर के गंतव्यों के लिए $280 तक होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह वृद्धि भी पूरी तरह से ईंधन की बढ़ी हुई लागत को कवर कर पाएगी या नहीं।
CEO के इस्तीफे से बढ़ी चिंता
एयर इंडिया के लिए यह बड़ा वित्तीय फेरबदल तब हो रहा है जब कंपनी के CEO कैम्पबेल विल्सन (Campbell Wilson) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे से एयरलाइन के नेतृत्व में बदलाव आ गया है, जबकि कंपनी अपनी वित्तीय रिकवरी और आधुनिकीकरण के प्रयासों में जुटी हुई है।
वित्तीय नतीजे और प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
राजस्व (Revenue) में वृद्धि के बावजूद, एयर इंडिया अभी भी वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। टाटा ग्रुप की एविएशन इकाई ने फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए ₹78,636 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹10,859 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया। एयर इंडिया का खुद का स्टैंडअलोन नेट लॉस ₹3,976 करोड़ रहा। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब एयरलाइन अपने बेड़े के आधुनिकीकरण और एकीकरण की एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस बीच, एयर इंडिया के प्रतिस्पर्धी इंडिगो (IndiGo) ने भी घरेलू उड़ानों के लिए ₹275 से ₹950 तक की दूरी-आधारित सरचार्ज प्रणाली अपनाई है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय शुल्कों में भी भिन्नता रखी है।
सेक्टर का आउटलुक और आगे की राह
भारतीय विमानन क्षेत्र में वृद्धि की उम्मीद है, लेकिन उच्च ईंधन लागत और वैश्विक अस्थिरता के दबाव में है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने हाल ही में उद्योग के आउटलुक को स्थिर से घटाकर नकारात्मक कर दिया है। एयर इंडिया की भविष्य की सफलता काफी हद तक उसके अगले लीडर की लागतों को नियंत्रित करने, परिचालन में सुधार करने और बेड़े के उन्नयन को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी, खासकर कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच।