फ्यूल की बढ़ती कीमतें और एयरस्पेस के मुद्दे बने वजह
Air India द्वारा लगभग 100 रोजाना इंटरनेशनल उड़ानों में कटौती का मुख्य कारण जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल और लगातार बनी हुई एयरस्पेस (Airspace) की पाबंदियां हैं। मई की शुरुआत में ग्लोबल एवरेज जेट फ्यूल की कीमत बढ़कर $162.89 प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो फरवरी के $99.40 प्रति बैरल से काफी ज्यादा है। यह भारतीय एयरलाइंस के लिए कुल ऑपरेटिंग एक्सपेंस (Operating Expense) का अनुमानित 55-60% हिस्सा बन गया है।
इसके अलावा, 2025 से पाकिस्तानी एयरस्पेस के बंद होने के कारण Air India को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबे और कम कुशल रूट लेने पड़ रहे हैं। इन लंबी उड़ानों से फ्यूल की खपत और क्रू कॉस्ट (Crew Cost) दोनों बढ़ जाते हैं। कुछ उत्तरी अमेरिकी उड़ानों के लिए अब वियना या स्टॉकहोम जैसे शहरों में टेक्निकल स्टॉप (Technical Stop) की जरूरत पड़ रही है, जिससे एयरलाइन के मुनाफे (Profit) पर सीधा असर पड़ रहा है।
भारतीय एविएशन सेक्टर पर भारी दबाव
Air India की यह कटौती पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) के सामने आ रही बड़ी चुनौतियों को दर्शाती है। ICRA का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में इस सेक्टर को ₹17,000-18,000 करोड़ का घाटा हो सकता है, और इसका आउटलुक (Outlook) अब नेगेटिव है। IndiGo जैसी बड़ी कंपनियाँ भी फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) लगा रही हैं और रूट एडजस्ट कर रही हैं, लेकिन Air India पर अपने बड़े लॉन्ग-हॉल नेटवर्क (Long-haul Network) और एयरस्पेस एक्सेस (Airspace Access) की दिक्कतों के कारण ज्यादा बोझ है। दुनिया भर में भी एयरलाइंस ने बढ़ती फ्यूल लागत के जवाब में मई के शेड्यूल से लगभग 13,000 फ्लाइट्स कम की हैं।
घाटे वाले रूट पर लेना पड़ रहा मुश्किल फैसला
वर्तमान कीमत के माहौल में Air India के कई अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल (Ultra-long-haul) और लॉन्ग-हॉल इंटरनेशनल रूट मुनाफेमंद नहीं रह गए हैं। CEO Campbell Wilson ने कहा कि एयरलाइन "अधिकांश उड़ानों पर ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Cost) भी वसूल नहीं कर पा रही है" और अगर फ्यूल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो और कटौती करनी पड़ सकती है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (Federation of Indian Airlines) ने सरकार को सूचित किया है कि सेक्टर "बेहद तनाव" में है और बिना तत्काल राहत के "बंद होने की कगार पर" है। भारतीय ग्राहक कीमत के प्रति संवेदनशील हैं, इसलिए बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा किराए में डालने से मांग कम हो सकती है।
चुनौतियों के बीच Air India की रणनीति
इन चुनौतियों के बावजूद, Tata Group के तहत Air India का ट्रांसफॉर्मेशन (Transformation) जारी है। नेटवर्क रैशनलाइजेशन (Network Rationalization) को एयरलाइन की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए एक आवश्यक कदम माना जा रहा है। यह एयरलाइन को अपने बचे हुए मुनाफे वाले रूट्स (Profitable Routes) को ऑप्टिमाइज (Optimize) करने और छोटे, अधिक व्यवहार्य घरेलू व अंतरराष्ट्रीय सेगमेंट (Domestic and International Segments) पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा। मैनेजमेंट लागत पर "लगातार फोकस" और क्षमता तैनाती (Capacity Deployment) पर सावधानी बरतने का संकेत दे चुका है।
