सुरक्षा सर्वोपरि: Air India का Boeing 787-8 पर बड़ा फैसला
Air India ने यात्री और क्रू की सुरक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता बनाते हुए अपने एक Boeing 787-8 विमान को अस्थायी रूप से परिचालन से बाहर कर दिया है। यह महत्वपूर्ण कदम एक पायलट द्वारा विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच में किसी संभावित गड़बड़ी की रिपोर्ट किए जाने के बाद उठाया गया है। एयरलाइन इस रिपोर्ट की तत्काल और गहन जांच के लिए सीधे विमान निर्माता Boeing के साथ मिलकर काम कर रही है।
पिछली दुर्घटनाओं का साया और रेगुलेटरी एक्शन
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एविएशन इंडस्ट्री में सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है। पिछले साल हुई Air India Flight AI171 दुर्घटना, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी, के बाद से सुरक्षा मानकों पर पहले से कहीं अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उस दुर्घटना की जांच में फ्यूल सप्लाई कट-ऑफ की वजह से स्विच एक्टिवेशन की बात सामने आई थी। इसी को देखते हुए, DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने भी बोइंग के विभिन्न मॉडलों के फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉक की जांच के नए निर्देश जारी किए थे। Air India को इस घटना की जानकारी DGCA को दे दी गई है, जिससे नियामक को पूरी पारदर्शिता के साथ अवगत रखा जा सके।
यह ध्यान देने योग्य है कि DGCA के निर्देश के बाद Air India के पूरे Boeing 787 बेड़े की फ्यूल कंट्रोल स्विच पर पहले भी विस्तृत जांच की जा चुकी थी, और उस समय किसी भी खराबी का पता नहीं चला था।
Boeing का दोहरा मोर्चा: ऑर्डर और जांच
यह ग्राउंडिंग ऐसे समय में हुई है जब Boeing (NYSE: BA) एक तरफ बड़ी संख्या में नए ऑर्डर हासिल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रोडक्शन क्वालिटी और सुरक्षा को लेकर रेगुलेटरी जांच के दायरे में भी है। हाल ही में Air India ने Boeing से 250 विमानों का एक बड़ा ऑर्डर दिया है, जिसमें 30 नए 737 MAX जेट शामिल हैं, जो जनवरी 2026 तक डिलीवर होने की उम्मीद है। Boeing का मार्केट कैप लगभग $183.55 बिलियन है। इसके बावजूद, FAA (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) और अन्य नियामक निकायों से उत्पादन गुणवत्ता को लेकर लगातार जांच बनी हुई है।
Air India का ट्रांसफॉर्मेशन और भविष्य की राह
Tata Sons के स्वामित्व वाली Air India वर्तमान में अपने महत्वाकांक्षी पांच साल के ट्रांसफॉर्मेशन प्लान 'Vihaan.AI' पर काम कर रही है, जिसे सितंबर 2022 में शुरू किया गया था। हालांकि, कंपनी के वित्तीय जानकारों का मानना है कि प्रॉफिट (मुनाफे) में वापसी में अभी 3 से 4 साल का समय लग सकता है। अनुमान है कि 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को ₹15,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो सकता है।