'एहतियात' या 'खतरे' की घंटी? जांच शुरू
एक Boeing 787-8 (रजिस्ट्रेशन VT-ANX) के उड़ान के दौरान फ्यूल कंट्रोल स्विच के 'RUN' पोजीशन से 'CUTOFF' में खिसकने और ठीक से लॉक न होने की रिपोर्ट के बाद, Air India ने एहतियात के तौर पर उस विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया। इसी के साथ, कंपनी ने अपने पूरे 33 विमानों के बेड़े की गहन जांच शुरू कर दी है।
पिछली दुर्घटना से मिलता-जुलता मामला
यह घटना जून 2025 में अहमदाबाद में हुए 260 लोगों की जान लेने वाले दुखद AI-171 क्रैश की याद दिलाती है, जिसकी प्रारंभिक जांच में भी फ्यूल सप्लाई बाधित होने का कारण फ्यूल कंट्रोल स्विच का 'CUTOFF' पोजीशन में जाना बताया गया था।
नियामक इतिहास और DGCA का सख्त रुख
यह ध्यान देने योग्य है कि 2018 में US Federal Aviation Administration (FAA) ने ऐसे ही फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म की संभावित खराबी को लेकर एक Airworthiness Information Bulletin (SAIB) जारी किया था। हालांकि, उस समय यह एक सलाह थी। लेकिन जून 2025 की घातक दुर्घटना के बाद, भारत की Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने सभी भारतीय एयरलाइंस के लिए 21 जुलाई 2025 तक ऐसे प्रभावित Boeing विमानों के निरीक्षण को अनिवार्य कर दिया था। Air India का कहना है कि DGCA के निर्देश के बाद उन्होंने अपने 787 बेड़े की पहले ही जांच की थी और तब कोई समस्या नहीं मिली थी।
सप्लायर Honeywell और Boeing पर कड़ी नज़र
इस स्विच का निर्माण करने वाली कंपनी Honeywell (HON) है, जो इस मामले में Air India और Boeing (BA) के साथ मिलकर काम कर रही है। यह घटना Boeing के 787 विमानों की प्रोडक्शन क्वालिटी और उसके सप्लायर्स पर लगे सवालों को और गहरा कर रही है। Boeing, जिसके शेयर 3 फरवरी 2026 को लगभग $234.85 पर थे और मार्केट कैप लगभग $183.55 बिलियन थी, पहले भी 787 की उत्पादन गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों का सामना कर चुका है।
Honeywell का मजबूत प्रदर्शन
Honeywell ने 2 फरवरी 2026 को लगभग $226.62 पर ट्रेड किया, जिसकी मार्केट कैप करीब $143.9 बिलियन थी। कंपनी के एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज डिवीजन ने 2025 की चौथी तिमाही में 13% की सालाना बिक्री वृद्धि और $37 बिलियन से अधिक के बैकलॉग के साथ मजबूत प्रदर्शन किया है।
उद्योग पर व्यापक असर
यह सब घटनाक्रम विमानन सुरक्षा, विशेष रूप से 787 के फ्यूल सिस्टम की विश्वसनीयता पर नियामक और उद्योग की चौकस निगाहें बनाए रखेगा। यह Boeing की प्रोडक्शन रैंप-अप योजनाओं को प्रभावित कर सकता है और सप्लायर्स के साथ उसके संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है। निवेशक Boeing की इन मुद्दों को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से हल करता है, इस पर बारीकी से नज़र रखेंगे।