Air India के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड घाटा पिछले साल के **₹10,858 करोड़** से बढ़कर **₹22,238 करोड़** पर पहुंच गया है। इनकम में **8.6%** की गिरावट और विदेशी मुद्रा (Forex) के बढ़ते खर्चों ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मुनाफे पर क्यों लगा ग्रहण?
Air India के लिए यह साल काफी कठिन साबित हुआ है। जहां एक तरफ कंपनी की टोटल इनकम 8.6% घटकर ₹71,869.94 करोड़ रह गई, वहीं दूसरी तरफ कंपनी के कुल खर्चे 4.9% बढ़कर ₹93,733.31 करोड़ तक पहुंच गए। आय और खर्चों के बीच का यह बड़ा अंतर कंपनी के नेट लॉस को दोगुना करने का मुख्य कारण बना।
फॉरेक्स घाटे का दबाव
नुकसान को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका विदेशी मुद्रा (Forex) के नुकसान की रही। कंपनी को इस मोर्चे पर ₹7,388.23 करोड़ का झटका लगा है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा महज ₹1,545.01 करोड़ था। चूंकि एयरलाइन का ईंधन और लीजिंग का एक बड़ा हिस्सा विदेशी करेंसी में होता है, इसलिए करेंसी उतार-चढ़ाव का सीधा असर बैलेंस शीट पर दिखा है।
मेंटेनेंस और अन्य खर्चे
ऑपरेशंस की बात करें, तो एयरक्राफ्ट रिपेयर और मेंटेनेंस का खर्च 7.7% बढ़कर ₹14,976.45 करोड़ हो गया। हालांकि, ईंधन खर्चों में थोड़ी राहत जरूर मिली, जो 7.4% कम होकर ₹26,871.80 करोड़ रहे। इसके अलावा, जून 2025 में हुए AI171 हादसे के चलते कंपनी पर ₹429.05 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ा, जिसे कंपनी इंश्योरेंस के जरिए कवर करने की उम्मीद कर रही है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Air India शेयर बाजार (NSE या BSE) पर लिस्टेड नहीं है। यह Tata Group (हिस्सेदारी 74.9%) और Singapore Airlines (हिस्सेदारी 25.1%) की जॉइंट ओनरशिप वाली एक प्राइवेट कंपनी है। चेयरमैन N Chandrasekaran पहले ही कह चुके हैं कि एयरलाइन का यह ट्रांसफॉर्मेशन 5 से 10 साल का लंबा सफर है। फिलहाल कंपनी के सामने ऑपरेशंस को स्थिर करने और रेवेन्यू एफिशिएंसी सुधारने की बड़ी चुनौती है।
