Air India भारी वित्तीय दबाव के बीच अपनी महत्वाकांक्षी योजना पर आगे बढ़ रही है। FY2026 में कंपनी को **₹22,238 करोड़** का घाटा हुआ है, और अब नए CEO Tewolde Gebremariam के कंधों पर एयरलाइन को पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
Air India ने अपनी एग्रेसिव ट्रांसफॉर्मेशन स्ट्रैटेजी के तहत साल 2030 तक अपने फ्लीट को 500 से ज्यादा विमानों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब कंपनी कठिन दौर से गुजर रही है। मार्च 2026 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए एयरलाइन ने ₹22,238.23 करोड़ का कंसोलिडेटेड लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹10,858.83 करोड़ के नुकसान से कहीं ज्यादा है।
नेतृत्व में बदलाव
कंपनी में अब लीडरशिप बदल चुकी है। Campbell Wilson के जाने के बाद, 1 अक्टूबर 2026 को Tewolde Gebremariam ने CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला है। अब नई मैनेजमेंट टीम के सामने लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और कॉस्ट कंट्रोल के बीच बैलेंस बनाने की बड़ी चुनौती है।
ऑपरेशनल और फाइनेंशियल चुनौतियां
मौजूदा फाइनेंशियल परफॉर्मेंस एविएशन सेक्टर के कठिन माहौल को दर्शाती है। जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण एयरलाइन को कुछ एयरस्पेस से बचना पड़ रहा है, जिससे फ्लाइट्स के रास्ते लंबे हो गए हैं। इसका सीधा असर फ्यूल खपत और बढ़ते ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ा है। इसके अलावा, नए विमानों को शामिल करने और पुराने फ्लीट को अपग्रेड करने पर भारी कैपिटल खर्च हो रहा है, जो बैलेंस शीट पर दबाव डाल रहा है।
Air India में Tata Group की 74.9% हिस्सेदारी है, जबकि Singapore Airlines के पास 25.1% स्टेक है। कंपनी की रणनीति इस विश्वास पर टिकी है कि फ्लीट कैपेसिटी बढ़ने से लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलेगा, लेकिन मुनाफे की राह अब पूरी तरह से ऑपरेशनल खर्चों को मैनेज करने पर निर्भर है।
