क्या है पूरा मामला?
एयर इंडिया ने 12 मई 2026 को पुष्टि की है कि तेल अवीव से दिल्ली रूट पर उड़ान सेवाओं का निलंबन अब 30 जून तक जारी रहेगा। यह तय समय सीमा से आगे का विस्तार है, जो पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए किया गया है। एयरलाइन एग्जीक्यूटिव्स ने इस फैसले को क्षेत्र में जटिल परिचालन माहौल का नतीजा बताया है।
क्यों हो रही है देरी?
इस फैसले की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में सुरक्षा और परिचालन संबंधी गंभीर चिंताएं हैं। वैश्विक स्तर पर कई प्रमुख एयरलाइंस इस क्षेत्र में अपनी उड़ानें तब तक स्थगित कर रही हैं जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए। हालांकि, तेल अवीव से उड़ान भरने वाली इजरायली एयरलाइंस जैसे El Al, IsraAir, Arkia, और Air Haifa सीमित संचालन कर रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कमी के कारण यात्रियों, खासकर 40,000 से अधिक इजरायल में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा करना बेहद महंगा हो गया है।
एविएशन सेक्टर पर मार
यह निलंबन सिर्फ एयर इंडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक एविएशन इंडस्ट्री पर पड़ रहे भू-राजनीतिक अस्थिरता के असर को दर्शाता है। मार्च 2026 में वैश्विक एयर कार्गो डिमांड में 4.8% की सालाना गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा संबंध मध्य पूर्व में संघर्षों से लॉजिस्टिक्स हब पर पड़े असर से है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। अप्रैल 2026 तक, ATF की कीमतों में साल-दर-साल 18.2% की वृद्धि दर्ज की गई, और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स के लिए मई 2026 में यह कीमतें प्री-कॉन्फ्लिक्ट स्तर से 63% अधिक बताई गईं। ईंधन, जो एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 30-40% होता है, पर इस वृद्धि का बड़ा असर पड़ रहा है। अमेरिका में मार्च 2026 में ही ईंधन की प्रति गैलन लागत 31% बढ़ी थी।
भारतीय एविएशन सेक्टर की हालत
इस मुश्किल माहौल का सीधा असर भारतीय एविएशन सेक्टर पर भी दिख रहा है। देश के एविएशन सेक्टर को FY2026 (फाइनेंशियल ईयर 2026) के लिए ₹170-180 बिलियन के शुद्ध घाटे का अनुमान है। यह पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ी गिरावट है, जिसका मुख्य कारण भू-राजनीतिक दबाव और बढ़ते परिचालन खर्च हैं।
एयर इंडिया पर असर
एयर इंडिया को भी इस स्थिति का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मध्य पूर्व शेड्यूल में 70% की भारी कटौती के कारण कंपनी को न केवल राजस्व हानि का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि परिचालन संबंधी तनाव भी बढ़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक $2 बिलियन से अधिक का घाटा दर्ज कर सकती है। कंपनी की अस्थिर क्षेत्रों पर निर्भरता, डॉलर-आधारित खर्चों (जैसे एयरक्राफ्ट लीजिंग और मेंटेनेंस) में वृद्धि, और कमजोर होते रुपये ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसके अलावा, DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने भी भारतीय ऑपरेटरों को पश्चिम एशिया के उच्च जोखिम वाले हवाई क्षेत्रों से बचने के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है।
आगे क्या?
इन चुनौतियों के चलते, कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी अपनी उड़ानें स्थगित कर दी हैं। Lufthansa Group ने 30 जून तक, जबकि Delta, United, और Air Canada ने सितंबर तक तेल अवीव मार्ग पर अपनी उड़ानें निलंबित रखी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन मुश्किलों और बढ़ते परिचालन लागत के चलते, भारतीय एयरलाइंस गर्मी के सीजन में अपनी कुल उड़ान क्षमता में 30% तक की कटौती कर सकती हैं, क्योंकि कमजोर मांग और अनिश्चितताओं के कारण एडवांस बुकिंग भी प्रभावित हो रही है।
