वैल्यू कैरियर बनने की राह पर Air India Express
Air India Express अपने आप को 'वैल्यू कैरियर' के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है, जो पारंपरिक लो-कॉस्ट और फुल-सर्विस मॉडल के बीच की जगह भरेगी। कंपनी का लक्ष्य FY31 तक अपने फ्लीट (fleet) को तीन गुना बढ़ाकर 300 एयरक्राफ्ट तक ले जाना और 25% मार्केट शेयर हासिल करना है। इस विस्तार के लिए फ्यूल-एफिशिएंट (fuel-efficient) बोइंग 737 मैक्स जैसे नए विमानों को बेड़े में शामिल किया जा रहा है। इन पहलों के दम पर एयरलाइन को उम्मीद है कि FY27 की दूसरी छमाही में वह ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज कर लेगी। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूरे FY27 के लिए एयरलाइन से अभी भी नेट लॉस (net loss) की उम्मीद है।
Tata Aviation Group के घाटे का अंबार
Air India Express के इस पॉजिटिव प्रोजेक्शन के बावजूद, Tata के एविएशन ग्रुप के लिए वित्तीय चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्रुप की फ्लैगशिप एयरलाइन, Air India ने FY25 में ₹10,859 करोड़ का भारी नेट लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 48% अधिक है। पूरे Air India Group, जिसमें Air India Express और Vistara का विलय शामिल है, ने FY25 में ₹9,568.4 करोड़ का कंबाइंड नेट लॉस (बिफोर टैक्स) दर्ज किया। पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने जैसे बाहरी कारणों ने भी उड़ानों के रूट लंबे होने और ऑपरेशनल लागत बढ़ने से स्थिति को और खराब किया है। ग्रुप की पांच साल की ट्रांसफॉर्मेशन योजना 'Vihaan.AI' का लक्ष्य 2027 तक सेल्फ-सस्टेनेबिलिटी (self-sustainability) हासिल करना था, लेकिन अब प्रॉफिटेबिलिटी तीन से चार साल और दूर नजर आ रही है।
भारतीय एविएशन सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा
भारतीय एविएशन मार्केट में प्रतिस्पर्धा बहुत कड़ी है, जहां लो-कॉस्ट कैरियर्स का दबदबा है और वे लगभग 69% मार्केट कैपेसिटी रखते हैं। IndiGo इस बाजार में सबसे बड़ी कंपनी है, जिसका 2025 में मार्केट शेयर लगभग 64% रहा। Air India Group (Air India और Air India Express को मिलाकर) का 2025 में डोमेस्टिक मार्केट शेयर 27% रहा, जबकि Akasa Air जैसे नए खिलाड़ियों ने भी लगभग 5.2% मार्केट शेयर पर कब्जा कर लिया है। इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय एविएशन इंडस्ट्री मजबूत ग्रोथ के लिए तैयार है। अनुमान है कि 2033 तक यह सेक्टर 12.21% के CAGR से बढ़ेगा और 2034 तक एयरक्राफ्ट की कुल संख्या लगभग 2,250 तक पहुंच जाएगी। ऐसे में, फ्यूल-एफिशिएंट विमानों (जैसे Boeing 737 MAX) का इस्तेमाल लागत कम करने और पर्यावरण पर असर घटाने के लिए बेहद अहम होगा।
