Air India Express: मस्कट के लिए उड़ानें शुरू, पर गल्फ में अभी भी यात्रियों को सता रहा है संकट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Air India Express: मस्कट के लिए उड़ानें शुरू, पर गल्फ में अभी भी यात्रियों को सता रहा है संकट!
Overview

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय एयरलाइंस के लिए हवाई यात्रा में बड़े पैमाने पर व्यवधान बना हुआ है। एयर इंडिया एक्सप्रेस **3 मार्च** से मस्कट के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू करेगा, लेकिन यह सिर्फ एक छोटी सी राहत है क्योंकि इस क्षेत्र के अधिकांश हवाई मार्ग अभी भी बंद हैं।

गल्फ संकट के बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस की मस्कट के लिए सीमित वापसी

राहत की बात यह है कि एयर इंडिया एक्सप्रेस 3 मार्च से भारत के दिल्ली और कोच्चि जैसे शहरों से मस्कट के लिए कुछ चुनिंदा उड़ानें फिर से शुरू करने जा रही है। हालांकि, यह सिर्फ एक छोटा कदम है, क्योंकि मध्य पूर्व में जारी युद्ध जैसे हालात के चलते इस क्षेत्र में हवाई सफर पर अभी भी भारी संकट बना हुआ है।

गल्फ देशों में एयरस्पेस बंद, यात्रियों को बड़ी परेशानी

एयर इंडिया एक्सप्रेस की यह आंशिक बहाली एक बड़ी तस्वीर का छोटा सा हिस्सा है। बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े हब सहित गल्फ के कई देशों में हवाई मार्ग अभी भी बंद हैं। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण गल्फ के ग्यारह देशों के महत्वपूर्ण एयरस्पेस बंद कर दिए गए हैं, जिससे दुनिया भर में हजारों फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी हैं।

भारतीय एयरलाइंस पर बड़ा संकट, उड़ानों में भारी कटौती

इसका सीधा असर भारतीय एयरलाइंस पर दिख रहा है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने 28 फरवरी से 1 मार्च के बीच लगभग 450 अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स रद्द कर दीं। वहीं, SpiceJet को लगभग 75 और Air India Express को लगभग 85 उड़ानों को इसी अवधि में रद्द करना पड़ा। यह सब तब हो रहा है जब भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹17,000 से ₹18,000 करोड़ तक के बड़े नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

फ्यूल की बढ़ती कीमतें और फ्लाइट रूट बदलने का बड़ा बोझ

इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा आर्थिक असर है। युद्ध वाले इलाकों से बचकर निकलने के लिए फ्लाइट्स का रास्ता बदलने से उड़ान का समय बढ़ जाता है, जिससे फ्यूल की खपत काफी बढ़ जाती है। एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च का 35-40% तक फ्यूल पर जाता है। 2 मार्च, 2026 तक WTI क्रूड ऑयल $72 प्रति बैरल से ऊपर और ब्रेंट क्रूड $78 प्रति बैरल के पार पहुँच गया है। फ्यूल की कीमतों में यह उछाल, फ्लाइट शेड्यूल बदलने और यात्रियों की रीबुकिंग जैसी दिक्कतों के साथ मिलकर IndiGo और SpiceJet जैसी कंपनियों के मार्जिन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।

एयरलाइंस के लिए बड़ा वित्तीय खतरा

IndiGo की पेरेंट कंपनी InterGlobe Aviation का मार्केट कैप लगभग ₹1.75 लाख करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 58x के करीब है, जो मौजूदा हालात में जोखिम भरा हो सकता है। वहीं, SpiceJet का मार्केट कैप लगभग ₹2,242 करोड़ है, जो वित्तीय रूप से अधिक नाजुक स्थिति में है। इसका P/E रेश्यो नेगेटिव है और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.60 है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की लगभग 60% फ्लाइट्स मध्य पूर्व रूट पर निर्भर करती हैं, जबकि IndiGo के लिए यह 41% और SpiceJet के लिए मार्च के पूरे अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल का एक्सपोजर इसी क्षेत्र से है। ICRA का अनुमान है कि FY26 में एयर ट्रैफिक ग्रोथ पहले के अनुमानों से घटकर सिर्फ 0-3% रह सकती है।

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