Air India Express के पायलट एक नए वेतन ढांचे का विरोध कर रहे हैं। यह नया ढांचा **8% से 17%** तक की सैलरी बढ़ाने का वादा करता है, लेकिन इसमें इनकम को फ्लाइट के घंटों से जोड़ा गया है। इस विवाद के कारण एयरलाइन की ऑपरेशनल स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि मैनेजमेंट लागत कम करने की कोशिश में है।
सैलरी का नया फॉर्मूला: पायलटों की आपत्ति
Air India Express के पायलट एक नए प्रस्तावित कंपंसेशन स्ट्रक्चर (compensation structure) को मानने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह नया प्लान ऑपरेशनल जोखिम का बड़ा हिस्सा फ्लाइट क्रू पर डाल रहा है। हालांकि, नए ऑफर में अक्टूबर 2026 से 8% से 17% तक की सैलरी बढ़ोतरी का प्रावधान है, लेकिन कई पायलटों को अपनी मासिक आय की स्थिरता और लीव बेनिफिट्स (leave benefits) पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता है।
पगार का मुख्य विवाद क्या है?
विवाद का मुख्य बिंदु 40 घंटे के ब्लॉक पे (block pay) की गारंटी है। इस सिस्टम के तहत, एक पायलट की कमाई का बड़ा हिस्सा इस बात पर निर्भर करेगा कि वह असल में कितनी देर तक उड़ान भरता है। फ्लाइट क्रू के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि यह स्ट्रक्चर आय में अस्थिरता पैदा करेगा, क्योंकि फ्लाइट शेड्यूल में कटौती या बदलाव होने पर उनकी टेक-होम पे (take-home pay) कम हो सकती है। कई पायलटों ने कंपनी से पहले वाले सिस्टम पर लौटने की मांग की है, जिसके तहत 70 घंटे की फिक्स्ड पे गारंटी थी, जिससे फ्लाइट यूटिलाइजेशन (flight utilization) के बावजूद एक स्थिर आय सुनिश्चित होती थी।
वित्तीय स्थिति और मैनेजमेंट की रणनीति
यह विवाद Air India Group के गंभीर वित्तीय दबाव के बीच सामने आया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY26) में, ग्रुप ने कुल ₹22,238 करोड़ का नेट लॉस (net loss) दर्ज किया था। ऑपरेशनल खर्चों को कंट्रोल करने के लिए, एयरलाइन टैलेंट को बनाए रखने और लागत में सख्ती लाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। Air India Express ने हाल ही में अपने उधार लेने की सीमा को बढ़ाकर ₹20,000 करोड़ कर दिया है ताकि वह ऑपरेशनल खर्चों को पूरा कर सके और ग्लोबल एविएशन (aviation) की चुनौतियों, जैसे कि ऊंचे फ्यूल कॉस्ट (fuel cost) और एयरस्पेस रेस्ट्रिक्शन (airspace restrictions), का सामना कर सके। मैनेजमेंट के लिए, फ्लाइट आवर्स से सैलरी को जोड़ना, डाउनटाइम (downtime) के दौरान फिक्स्ड सैलरी देने के बजाय, सीधे रेवेन्यू-जेनरेटिंग एक्टिविटी (revenue-generating activity) से लेबर कॉस्ट को अलाइन (align) करने का एक तरीका है।
ऑपरेशंस के लिए संभावित जोखिम
किसी भी एयरलाइन के लिए, लेबर डिस्प्यूट (labor dispute) फ्लाइट्स में रुकावट का जोखिम पैदा करते हैं, जिसका सीधा असर कस्टमर सर्विस और ब्रांड की इमेज पर पड़ सकता है। मौजूदा स्थिति कंपनी के लिए एक नाजुक संतुलन पेश करती है। एक तरफ, उसे अपने बेड़े के विस्तार और सर्विस लेवल को बनाए रखने के लिए अनुभवी पायलटों की ज़रूरत है, वहीं दूसरी तरफ, उसे अपनी वित्तीय सेहत सुधारने का दबाव भी झेलना पड़ रहा है। लीव बेनिफिट्स (leave benefits) को लेकर असहमति, जहाँ पायलटों को डर है कि पेड लीव (paid leave) लेने पर उनकी वेरिएबल पे (variable pay) कम हो जाएगी, बातचीत को और जटिल बना रही है।
आगे क्या?
मैनेजमेंट ने पायलटों के लिए नए नियमों को स्वीकार करने की 28 अगस्त की डेडलाइन तय की है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या एयरलाइन अपने फ्लाइट क्रू के साथ कोई बीच का रास्ता निकाल पाती है या यह असहमति और लंबी बातचीत की ओर ले जाती है। पे डील (pay deal) के अलावा, एयरलाइन के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसका हाई फाइनेंशियल लीवरेज (financial leverage) और यह साबित करने की ज़रूरत है कि उसका मौजूदा टर्नअराउंड प्लान (turnaround plan) एक बेहद प्रतिस्पर्धी एविएशन सेक्टर में प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) दिला सकता है।
