Air India Express ने अपने कर्मचारियों के लिए एक अनोखी और गोपनीय सेल्फ-डिक्लेरेशन प्रोग्राम शुरू किया है। इसके ज़रिए कर्मचारी साइकोएक्टिव सब्सटेंस (मनोदैहिक नशीले पदार्थ) के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दे सकेंगे। यह कदम हाल ही में एयरलाइन ग्रुप में हुई सुरक्षा घटनाओं और DGCA के नियमों के बाद उठाया गया है, जिसका मकसद फ्लाइट सेफ्टी और कर्मचारियों की सेहत को प्राथमिकता देना है।
कर्मचारियों की सेहत, फ्लाइट की सुरक्षा
टाटा ग्रुप की सहायक कंपनी Air India Express ने अपने कर्मचारियों के लिए एक वॉलंटरी (स्वैच्छिक) और कॉन्फिडेंशियल (गोपनीय) सिस्टम लॉन्च किया है। इस सिस्टम के तहत, कर्मचारी साइकोएक्टिव सब्सटेंस के इस्तेमाल या उनकी लत के बारे में जानकारी दे सकते हैं। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्यूटी पर तैनात क्रू मेंबर पूरी तरह फिट रहें और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत मदद मिल सके।
यह कदम डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा तय किए गए नियमों के अनुरूप है। DGCA चाहता है कि एयरलाइन स्टाफ खुद से ऐसे किसी भी सब्सटेंस के इस्तेमाल के बारे में बताए, जिससे उनके काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
हालिया सुरक्षा घटनाओं का संदर्भ
यह पॉलिसी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में 4 अगस्त, 2026 को हुई एक गंभीर फ्लाइट दुर्घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट में अचानक ऊंचाई कम होने लगी थी, जिससे कई यात्री और क्रू मेंबर घायल हो गए थे। घटना के बाद, पायलट-इन-कमांड का टेस्ट किया गया, जिसमें वह मारिजुआना (गांजा) पॉजिटिव पाए गए। इस घटना के तुरंत बाद, 13 अगस्त, 2026 से Air India ग्रुप ने अपने सभी पायलट्स के लिए कंपल्सरी साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्टिंग शुरू कर दी थी।
टाटा एविएशन के लिए स्ट्रेटेजिक महत्व
भले ही Air India Express एक पब्लिक अनलिस्टेड कंपनी है, लेकिन टाटा ग्रुप के एविएशन सेक्टर के लिए इसका प्रदर्शन काफी अहम है। ग्रुप के लिए एक मजबूत सेफ्टी कल्चर बनाए रखना न केवल ऑपरेशंस के लिए जरूरी है, बल्कि एक बड़े इंटीग्रेशन फेज के दौरान अपनी इमेज को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इन्वेस्टर्स और एनालिस्ट्स सेफ्टी रिकॉर्ड्स और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर कड़ी नजर रखते हैं, क्योंकि इसमें चूक होने पर रेगुलेटरी एक्शन, ऑपरेशन में देरी और बढ़ती लागत का खतरा रहता है। सेल्फ-डिक्लेरेशन मॉडल की ओर यह बदलाव इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका मकसद सज़ा देने के बजाय सपोर्ट के ज़रिए समस्याओं का समाधान करना है।
इंडस्ट्री पर नजर
एविएशन सेक्टर फिलहाल सेफ्टी प्रोटोकॉल और क्रू फिटनेस पर विशेष ध्यान दे रहा है। बढ़ी हुई टेस्टिंग और रिपोर्टिंग मैकेनिज्म को लागू करने की सीधी लागत के अलावा, एयरलाइंस फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रूट इंटीग्रेशन जैसी चुनौतियों से भी जूझ रही हैं। इंडस्ट्री के लिए अगला महत्वपूर्ण अपडेट यह देखना होगा कि ये कंपल्सरी स्क्रीनिंग और वॉलंटरी डिक्लेरेशन पॉलिसियां कितनी प्रभावी साबित होती हैं। स्टेकहोल्डर्स इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या इन उपायों से सुरक्षा घटनाओं में कमी आती है या DGCA पूरे सेक्टर के लिए और कड़े नियम लागू करता है।
