Air India Express ने अपने विंटर 2026 शेड्यूल में **585** डेली फ्लाइट्स का ऐलान किया है, जिसमें टियर-3 शहरों पर खास फोकस है। कंपनी का विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब FY26 में इसे **₹6,767 करोड़** का बड़ा नेट लॉस हुआ है और इसने अपना कर्ज दायरा बढ़ाकर **₹20,000 करोड़** कर लिया है।
Air India Express ने 25 अक्टूबर, 2026 से अपने विंटर शेड्यूल की शुरुआत की है, जिसके तहत 585 डेली फ्लाइट्स संचालित होंगी। चेयरमैन निपुण अग्रवाल के मुताबिक, देश के 160 में से 120 एयरपोर्ट्स अपनी क्षमता के 40% से कम पर चल रहे हैं। कंपनी अब छोटे विमानों के जरिए उस मार्केट को टारगेट कर रही है जो फिलहाल रेलवे के दबदबे में है।
घाटे का गणित और कर्ज का बोझ
कंपनी के विस्तार की रणनीति के सामने फाइनेंशियल चुनौतियां बड़ी हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में एयर इंडिया एक्सप्रेस को ₹6,767 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जबकि पैरेंट कंपनी Air India का कंसोलिडेटेड लॉस ₹22,238 करोड़ रहा। जियो-पॉलिटिकल तनाव, फ्यूल की बढ़ती कीमतें और कमजोर फॉरेक्स रेट्स ने मार्जिन पर दबाव डाला है। इसे देखते हुए कंपनी ने अपनी उधार लेने की क्षमता को दोगुना करके ₹20,000 करोड़ कर दिया है।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए अभी भी सेक्टर को विदेशी सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कॉस्ट बढ़ रही है। IndiGo और Akasa Air जैसे प्रतिस्पर्धियों के साथ प्राइस वॉर के कारण, एयरलाइंस के लिए बढ़ती लागत को टिकट की कीमतों में जोड़ना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मार्केट का 'प्राइस सेंसिटिव' होना मुनाफे के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
आने वाले समय में कंपनी के लिए दो चीजें सबसे बड़ी चुनौती होंगी: कर्ज का सही मैनेजमेंट और कम क्षमता वाले एयरपोर्ट्स पर ऑपरेशंस का सही इस्तेमाल। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या कंपनी अपने कर्ज के बोझ को कम कर पाती है और विदेशी मेंटेनेंस पर निर्भरता कम करके अपने बॉटम लाइन को सुधार पाती है या नहीं।
