Air India के चीफ कमर्शियल ऑफिसर निपुण अग्रवाल ने कहा है कि भारी भरकम टैक्स एविएशन सेक्टर की ग्रोथ में सबसे बड़ी रुकावट है। बढ़ते फ्यूल प्राइसेज और फाइनेंशियल दबाव के बीच यह बयान निवेशकों के लिए सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
टैक्स का बोझ और कंपनियों की चुनौती
Air India के चीफ कमर्शियल ऑफिसर और Air India Express के चेयरमैन निपुण अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि सेक्टर के विस्तार में टैक्स का मौजूदा स्ट्रक्चर बड़ी बाधा बना हुआ है। अक्टूबर 2026 में दिए गए उनके बयानों से साफ है कि एयरलाइंस के लिए आम आदमी तक सस्ती हवाई सेवा पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
घाटे का गणित और निवेशकों की चिंता
एविएशन सेक्टर इस समय दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ महंगे फ्यूल की समस्या और दूसरी तरफ कड़ी प्रतिस्पर्धा। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में Air India का कंसोलिडेटेड घाटा ₹22,200 करोड़ के पार निकल गया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि एयरलाइंस का प्रॉफिट मार्जिन पूरी तरह से इन्हीं ऑपरेटिंग कॉस्ट पर निर्भर करता है।
फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी
इसी दबाव को देखते हुए एयरलाइंस ने अपना बोझ कम करने के लिए कदम उठाए हैं। 9 अक्टूबर 2026 से Air India और Air India Express ने अपने डोमेस्टिक और इंटरनेशनल रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक सरकार टैक्स और फ्यूल प्राइसिंग पर कोई राहत भरा फैसला नहीं लेती, तब तक कंपनियों के लिए अपनी विस्तार योजनाओं को मुनाफे में तब्दील करना कठिन रहेगा।
फिलहाल, निवेशकों की नजरें सरकार की आगामी नीतियों पर टिकी हैं, क्योंकि वही यह तय करेंगी कि आने वाले समय में एविएशन कंपनियां Tier 2 और Tier 3 शहरों में कितनी तेजी से अपना नेटवर्क बढ़ा पाती हैं।
