मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण Air India की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एयरस्पेस पर पाबंदियों के चलते कंपनी को लंबे और महंगे रूट से फ्लाइट्स उड़ानी पड़ रही हैं, जिससे फ्यूल की खपत और ऑपरेशनल कॉस्ट में भारी इजाफा हुआ है। टाटा ग्रुप की इस कंपनी ने रियाद के लिए अपनी उड़ानें **15 अक्टूबर, 2026** तक सस्पेंड कर दी हैं। वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹22,238 करोड़** पहुंच गया है।
बढ़ते ऑपरेशनल दबाव की वजह
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता ने Air India के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एयरस्पेस पर पाबंदियों और पाकिस्तानी एयरस्पेस पर पहले से लगे प्रतिबंध के कारण, एयरलाइन को यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के लिए लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। ये घुमावदार रास्ते न केवल फ्लाइट का समय बढ़ा रहे हैं, बल्कि ईंधन (Fuel) की खपत को भी एक नई ऊंचाई पर ले गए हैं।
रियाद की उड़ानें सस्पेंड
सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, एयरलाइन ने रियाद के लिए अपनी सेवाओं को 15 अक्टूबर, 2026 तक बंद रखने का फैसला किया है। लंबे रूट के कारण कई फ्लाइट्स को रिफ्यूलिंग के लिए बीच में रुकना पड़ रहा है, जिससे लैंडिंग चार्ज और ग्राउंड हैंडलिंग का खर्च और भी ज्यादा हो गया है। मैनेजमेंट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में हुए ये आर्थिक नुकसान पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हैं।
घाटे का गणित
कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर नजर डालें तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए एयरलाइन ने ₹22,238 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जो कि पिछले साल के ₹10,858 करोड़ के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। हालांकि Air India अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन टाटा ग्रुप के तहत काम करने के कारण एविएशन सेक्टर पर इसके असर को गहराई से देखा जा रहा है।
एविएशन सेक्टर के लिए बड़ी चेतावनी
यह संकट संकेत दे रहा है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता किस तरह एविएशन सेक्टर के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। ऊंचे एटीएफ (ATF) दाम और लंबे रूट की बाधाएं अब एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा दबाव डाल रही हैं। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस कब तक सामान्य होता है और अन्य एविएशन कंपनियों के मुनाफे पर इसका क्या असर पड़ेगा।
