Tewolde Gebremariam ने **1 अक्टूबर 2026** से Air India के नए CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार संभाल लिया है। सरकारी सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद उनकी नियुक्ति पर मुहर लगी है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कंपनी के भारी-भरकम **₹22,238 करोड़** के नेट लॉस को कम करने और फ्लीट विस्तार के बीच मुनाफे की राह तलाशने की है।
चुनौतियों का पहाड़
Gebremariam का कार्यभार संभालना ऐसे समय में हुआ है जब Tata Group अपनी एविएशन यूनिट्स को एक करने और विस्तार करने की आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है। कंपनी का फिलहाल 500 से ज्यादा विमानों का ऑर्डर बुक है, जिस पर काफी कैपिटल खर्च हो रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी को ₹22,238 करोड़ का घाटा हुआ था, जो आने वाले समय में मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
अनुभवी लीडर का अनुभव
नए CEO के पास काफी तजुर्बा है। वह Ethiopian Airlines में 11 साल तक ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव रह चुके हैं और Delta Air Lines में रणनीतिक सलाहकार (Strategic Adviser) के तौर पर काम किया है। अब देखना यह है कि क्या वह एयर इंडिया में ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सुरक्षा प्रोटोकॉल को नई ऊंचाई पर ले जा पाएंगे।
रिस्क और भविष्य की राह
एविएशन सेक्टर फिलहाल जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और जेट फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। एयर इंडिया को न केवल अपने कॉस्ट बेस को स्टेबल करना होगा, बल्कि फ्लीट इंटीग्रेशन के साथ-साथ सर्विस और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन भी बनाना होगा। टाटा ग्रुप के लिए, Gebremariam का नेतृत्व कंपनी की फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी को सुधारने के लिए निर्णायक साबित होगा।
