Air India के CEO Tewolde Gebremariam ने कंपनी के भारी घाटे को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। एयरलाइन अपने Airbus A350 फ्लीट के मेंटेनेंस खर्च की समीक्षा कर रही है, जो टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से **$1.5 बिलियन** की नई फंडिंग हासिल करने के लिए बेहद जरूरी है।
खर्चों पर लगाम लगाने की कवायद
एयर इंडिया के नए CEO Tewolde Gebremariam ने कंपनी की गिरती आर्थिक सेहत को सुधारने के लिए कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। कंपनी ने हाल ही में ₹220 अरब का रिकॉर्ड कंसोलिडेटेड सालाना नुकसान दर्ज किया है। अब एयरलाइन का पूरा ध्यान अपने ऑपरेशनल खर्चों को कम करने पर है। कंपनी खास तौर पर अपने Airbus A350-900 फ्लीट के मेंटेनेंस बिलों की दोबारा जांच कर रही है। Rolls-Royce के Trent XWB इंजनों के लिए 'TotalCare' प्रोग्राम के तहत हो रहे खर्चों को कम करना अब एयरलाइन की प्राथमिकता है ताकि बैलेंस शीट को बेहतर बनाया जा सके।
नई फंडिंग और कड़ी शर्तें
इस समय एयर इंडिया अपने मुख्य शेयरहोल्डर्स, टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से $1.5 बिलियन की फ्रेश इक्विटी जुटाने के लिए बातचीत कर रही है। हालांकि, यह डील काफी पेचीदा बनी हुई है। निवेशकों ने सख्त गवर्नेंस लागू की है, जिसके तहत एयरलाइन को फंड मिलने से पहले खर्चों पर लगाम का ठोस प्रमाण देना होगा।
बड़े बदलावों की तैयारी
इंजन मेंटेनेंस के अलावा, एयरलाइन स्ट्रक्चरल बदलावों पर भी विचार कर रही है:
- Air India Express का एकीकरण: मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग फंक्शन को मिलाने से एडमिनिस्ट्रेटिव अड़चनें कम हो सकती हैं।
- कार्गो बिजनेस: वर्तमान में कार्गो की केवल 35% क्षमता का ही उपयोग हो पा रहा है, जिसे ऑप्टिमाइज करके रेवेन्यू बढ़ाने की योजना है।
फिलहाल, एयर इंडिया ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच अपने संचालन को सुव्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में फंडिंग डील का नतीजा यह तय करेगा कि एयरलाइन अपनी वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने में कितनी सफल होती है।
