संकट के बीच नेतृत्व परिवर्तन
टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली Air India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैम्पबेल विल्सन के इस्तीफे ने एयरलाइन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। हालांकि उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था, लेकिन यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब एयरलाइन गंभीर वित्तीय दबाव और ऑपरेशनल समस्याओं से जूझ रही है, जो उसकी वापसी के प्रयासों में बाधा डाल रही हैं। विल्सन की जगह लेने वाले नए सीईओ की तलाश शुरू हो गई है, क्योंकि एयरलाइन रिकॉर्ड घाटे और भू-राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
भारी वित्तीय और ऑपरेशनल दबाव
कैम्पबेल विल्सन तब तक अपने पद पर बने रहेंगे जब तक कि उनकी जगह कोई नया व्यक्ति नियुक्त नहीं हो जाता। उनके कार्यकाल में सितंबर 2022 में 'Vihaan.AI' ट्रांसफॉर्मेशन प्लान की शुरुआत और Vistara का विलय शामिल था। हालांकि, उनके कार्यकाल पर बढ़ते वित्तीय लागतों का साया रहा है। एयरलाइन को मार्च 2026 को समाप्त होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹20,000 करोड़ से अधिक के घाटे की उम्मीद है, जो FY25 में ₹10,859 करोड़ के कंसोलिडेटेड घाटे के बाद आया है।
Air India के ऑपरेशंस को वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण बढ़े एयरस्पेस प्रतिबंधों से बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उड़ानों का समय और ईंधन की खपत बढ़ी है। इन प्रतिबंधों के कारण पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर को अकेले ₹2,500 करोड़ का अनुमानित नुकसान हुआ है। वहीं, पाकिस्तान के एयरस्पेस का विस्तारित बंद Air India को अकेले ₹4,000 करोड़ का नुकसान पहुंचा चुका है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और इंडस्ट्री का हाल
Air India की वित्तीय स्थिति उसके मुख्य घरेलू प्रतिद्वंद्वी IndiGo से बिल्कुल अलग है। अप्रैल 2026 तक, IndiGo (InterGlobe Aviation) का मार्केट वैल्यू लगभग ₹1.6-1.7 ट्रिलियन था और इसका P/E रेश्यो लगभग 50.56 था। भले ही IndiGo को भी ऑपरेशनल दिक्कतों और लेबर कॉस्ट के कारण Q3FY26 में नेट प्रॉफिट में 78% की गिरावट का सामना करना पड़ा, लेकिन उसकी मजबूत वित्तीय हालत और 64.1% की प्रभावी मार्केट शेयर (घरेलू) Air India के 27.2% शेयर की तुलना में कहीं बेहतर है।
एविएशन इंडस्ट्री का समग्र आउटलुक नकारात्मक है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रा का अवमूल्यन और जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें प्रमुख चिंताएं हैं। ICRA ने FY26 के लिए इंडस्ट्री-व्यापी नेट लॉस ₹17,000-18,000 करोड़ रहने का अनुमान लगाया है।
AI171 क्रैश के बाद जांच और वित्तीय तस्वीर
CEO के नेतृत्व परिवर्तन का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब एयरलाइन गंभीर ऑपरेशनल और प्रतिष्ठा संबंधी समस्याओं से गुजर रही है। 12 जून, 2025 को हुई फ्लाइट AI171 की घातक दुर्घटना, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी, एयरलाइन पर गहरा असर डाल रही है। शुरुआती जांचों से संकेत मिला था कि टेकऑफ के तुरंत बाद फ्यूल कंट्रोल स्विच को 'CUTOFF' स्थिति में ले जाया गया था, जिसमें उस समय कोई मैकेनिकल या मेंटेनेंस की खराबी नहीं पाई गई थी।
इस त्रासदी, साथ ही CEO कैम्पबेल विल्सन के क्रैश के बाद दिए गए भाषण में साहित्यिक चोरी के आरोपों ने यात्री विश्वास को नुकसान पहुंचाया है और नियामक ध्यान बढ़ाया है। एयरलाइन के वित्तीय पूर्वानुमान बताते हैं कि FY2026 में घाटा पिछले साल के मुकाबले दोगुना होकर ₹20,000 करोड़ से अधिक हो सकता है। रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि विल्सन के कार्यकाल के दौरान योजनाओं के कार्यान्वयन की गति और जमीनी स्तर पर सुधारों को लेकर चिंताओं के कारण टाटा संस ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी थी, भले ही उनका अनुबंध जून 2027 तक वैध था।
नए नेतृत्व के लिए चुनौतियां
Air India का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह ऐसे अनुभवी लीडर ढूंढ पाती है या नहीं, जो गंभीर वित्तीय दबाव और ऑपरेशनल चुनौतियों से निपट सके। संभावित उत्तराधिकारियों पर चर्चा चल रही है, जिसमें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के उम्मीदवारों पर विचार किया जा रहा है। एयरलाइन की लाभप्रदता की राह, जो अधिग्रहण के पांच साल में अपेक्षित थी, अब तीन से चार साल और बढ़ने की उम्मीद है।