Air India ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने नए **9-एकड़** के मेंटेनेंस और रिपेयर फैसिलिटी का काम शुरू कर दिया है। यह कदम कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाने और भारी-भरकम फ्लीट एक्सपेंशन प्लान को सपोर्ट करने के लिए बेहद अहम है।
Air India ने अब इन-हाउस मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) फैसिलिटी की नींव रख दी है। यह नया हैंगर एक साथ बड़े वाइडबॉडी विमानों और छोटे नैरोबॉडी विमानों के रखरखाव में सक्षम होगा। यह कदम एयरलाइन के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स पर निर्भरता कम कर रही है।
फ्लीट मैनेजमेंट में स्ट्रैटेजिक बदलाव
टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद, Air India ने 470 विमानों का ऑर्डर दिया है। इतने बड़े फ्लीट को मैनेज करने के लिए खुद की तकनीकी फैसिलिटी होना जरूरी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विमानों के ग्राउंडेड रहने का समय (Turnaround time) घटेगा, जिससे एयरलाइन की सर्विस रिलायबिलिटी और फ्लाइट ऑपरेशंस में सुधार होगा।
आत्मनिर्भर एविएशन की ओर कदम
अब तक भारतीय एयरलाइंस को भारी मेंटेनेंस के लिए अक्सर विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती थी। दिल्ली में यह नया हैंगर न केवल लागत कम करेगा बल्कि भारत में एविएशन मेंटेनेंस इकोसिस्टम को भी मजबूती देगा।
निवेशकों के लिए अहम बातें
हालांकि यह प्रोजेक्ट एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए है, लेकिन इसमें होने वाला भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर निवेशकों की नजर में रहेगा। मार्केट की पैनी नजर इस बात पर होगी कि कंपनी कितनी तेजी से इस प्रोजेक्ट को पूरा करती है और कैसे यह लॉन्ग-टर्म में कंपनी के मुनाफे और परिचालन लागत को नियंत्रित करने में मदद करता है।
