क्यों बढ़ेंगी हवाई किराए?
मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के दाम आसमान छू रहे हैं। इसी वजह से Air India और Air India Express ने 12 मार्च से घरेलू उड़ानों और सार्क देशों (SAARC) के लिए टिकटों पर ₹399 का अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी इसका असर दिखेगा। पश्चिम एशिया (West Asia) के लिए $10, अफ्रीका (Africa) के लिए $90 और दक्षिण पूर्व एशिया (Southeast Asia) के लिए $60 का सरचार्ज जोड़ा गया है। अब तक इस सरचार्ज से मुक्त रहे सिंगापुर (Singapore) रूट पर भी यह लागू होगा। एयरलाइन समूह ने कहा कि जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) ऑयल $87.66 प्रति बैरल तक पहुँच गया है।
इंडस्ट्री पर बढ़ता दबाव
Air India का यह कदम पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर पर बढ़ते दबाव को दिखाता है। IndiGo जैसी एयरलाइन्स पहले भी फ्लाइट की दूरी के हिसाब से ₹300 से लेकर ₹1,000 तक का फ्यूल सरचार्ज लगा चुकी हैं। हालांकि, ATF की कीमतों में गिरावट के बाद IndiGo ने जनवरी 2024 में इसे हटा दिया था। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह संभव है कि दूसरी एयरलाइन्स भी फिर से ऐसा कदम उठाएं। SpiceJet के चेयरमैन ने तो चेतावनी भी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल पर भी बनी रहीं, तो डोमेस्टिक एयरलाइन्स को फ्यूल सरचार्ज लगाना पड़ सकता है। भारतीय एयरलाइन्स पहले से ही पतले मार्जिन पर काम कर रही हैं और फाइनेंशियल ईयर 2026 तक ₹17,000 से ₹18,000 करोड़ का नेट लॉस झेलने का अनुमान है।
प्रमुख जोखिम और चुनौतियाँ
भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा खतरा ऑपरेटिंग कॉस्ट में लगातार हो रही बढ़ोतरी है, खासकर ATF की कीमतों में। मध्य पूर्व के हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल के दाम $150 प्रति बैरल तक जा सकते हैं, जिससे भारत जैसे कच्चे तेल के शुद्ध आयातक देश की GDP ग्रोथ पर 0.25% तक का असर पड़ सकता है। 4 मार्च, 2026 को रुपया $1 के मुकाबले ₹92 के पार चला गया था, जिससे आयात लागत और बढ़ गई है। हाल ही में DGCA ने 26 मार्च, 2026 से लागू होने वाले रिफंड और कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किए हैं। इनमें 48 घंटे की फ्री कैंसिलेशन विंडो और कैंसिलेशन चार्ज पर बेसिक फेयर + फ्यूल सरचार्ज की सीमा तय की गई है। हालांकि ये नियम ग्राहकों को राहत देंगे, लेकिन बढ़ती लागत के दौर में एयरलाइन्स की कमाई पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, मध्य पूर्व में एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइन्स की कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी हैं। ये सभी फैक्टर्स एयरलाइन्स के मार्जिन पर भारी दबाव डाल रहे हैं।
भविष्य का नज़रिया
फिलहाल भारतीय एयरलाइन्स के लिए भविष्य की राहें थोड़ी मुश्किल भरी दिख रही हैं। समस्या मांग में कमी की नहीं, बल्कि लागत में अचानक आए उछाल की है। UBS जैसे एनालिस्ट्स ने भी InterGlobe Aviation (IndiGo) के टारगेट प्राइस को घटाया है, जिसका कारण भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें बताई गई हैं। हालांकि, लंबी अवधि में भारत के एविएशन सेक्टर की डिमांड मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जो आर्थिक विकास से प्रेरित है। लेकिन लागत का दबाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें मार्जिन पर पैनी नजर रखेंगी।