Mumbai International Airport Ltd (MIAL) का **265** वीकली इंटरनेशनल स्लॉट घटाने का फैसला एयरलाइंस को नागवार गुजरा है। टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के लिए लिए गए इस फैसले से विंटर शेड्यूल बिगड़ने का डर है, जिसके चलते नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने **6 अक्टूबर** को आपातकालीन बैठक बुलाई है।
मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ऑपरेशनल विवाद बढ़ता जा रहा है। अडानी ग्रुप की सब्सिडियरी कंपनी MIAL ने टर्मिनल-1 के रिडेवलपमेंट के लिए 25 अक्टूबर 2026 से इंटरनेशनल फ्लाइट्स के 265 वीकली डिपार्चर स्लॉट कम करने का प्रस्ताव रखा है। यह टर्मिनल-2 की मौजूदा क्षमता का लगभग 33% है।\n\n### एयरलाइंस क्यों हैं नाराज?\nइंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) समेत तमाम विमानन कंपनियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। एयरलाइन ऑपरेटर्स कमेटी (AOC) का कहना है कि उन्होंने अपना विंटर 2026-27 का शेड्यूल जून में ही फाइनल कर लिया था। अचानक हुए इस बदलाव से फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ेंगी, जिससे एयरलाइंस को न केवल भारी वित्तीय नुकसान होगा, बल्कि उनकी साख पर भी असर पड़ेगा। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भी इस पर चिंता जताते हुए डेटा पारदर्शिता की मांग की है।\n\n### मंत्रालय की दखल\nMIAL ने एयरलाइंस को 6 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे तक स्लॉट हटाने की डेडलाइन दी है, वरना वे एकतरफा कटौती करेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उसी दिन सभी पक्षों के साथ इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है ताकि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन बनाया जा सके।\n\n### नवी मुंबई एयरपोर्ट का गणित\nविवाद का एक बड़ा पहलू नई लागत भी है। MIAL कुछ ऑपरेशंस को नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शिफ्ट करना चाहती है, जहाँ यूजर डेवलपमेंट फीस ₹1,225 तय की गई है। यह मुंबई के मौजूदा ₹615 के शुल्क से लगभग दोगुना है। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर मास्टर प्लान में हुए इस बड़े बदलाव पर निवेशक और मार्केट एक्सपर्ट्स भी बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट बिजनेस की साख पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
