Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) ने Mundra Port पर अपना नया 'Empty Container Yard' शुरू किया है। हालांकि, बाहरी यार्ड्स पर पाबंदी के नए नियम ने लोकल ट्रांसपोर्टर्स की नाराजगी बढ़ा दी है, जिससे कामकाज में बाधा आ रही है।
नई रणनीति और चुनौतियां
Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) का यह कदम लॉजिस्टिक कॉस्ट को कम करने और शिपिंग लाइन्स के टर्नअराउंड समय को सुधारने के लिए उठाया गया है। कंपनी ने 1 सितंबर, 2026 से एक नया निर्देश जारी किया, जिसके तहत शिपिंग लाइन्स को केवल SEZ के भीतर के यार्ड्स का उपयोग करने के लिए बाध्य किया गया है। इस फैसले के साथ ही कंपनी ने बाहरी खाली यार्ड कोड्स को फ्रीज कर दिया है।
विरोध और हड़ताल का असर
इस नियम के लागू होते ही स्थानीय ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और डिपो ऑपरेटरों ने विरोध शुरू कर दिया है। 4 सितंबर, 2026 तक, इस हड़ताल के कारण कंटेनर डिलीवरी में देरी देखी जा रही है, जिससे सप्लाई चेन में शॉर्ट-टर्म फ्रिक्शन पैदा हो गया है। मुंद्रा पोर्ट, जो भारत के कुल कंटेनर वॉल्यूम का लगभग 35% प्रोसेस करता है, वहां साल में करीब 1.6 मिलियन TEUs खाली कंटेनर हैंडल किए जाते हैं।
भविष्य की राह और 'Ambition 2031'
यह फैसला कंपनी के 'Ambition 2031' रोडमैप का हिस्सा है, जिसके तहत अगले 5 साल में 6 मिलियन TEUs से अधिक की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल APSEZ का शेयर ₹1,707 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि कंपनी इस विरोध को कितनी जल्दी शांत करती है और ऑपरेशंस को कब तक सामान्य स्थिति में ला पाती है। अगर यह विवाद लंबा खिंचता है, तो मुनाफे और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दबाव बढ़ सकता है।
