Adani Airports अब अपने रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक नॉन-एरोनॉटिकल इनकम को **70%** तक ले जाना है, ताकि यात्रियों पर बोझ कम किया जा सके।
Adani Enterprises की सब्सिडियरी Adani Airports एक नई रणनीति पर काम कर रही है, जिसका सीधा फायदा हवाई यात्रियों को मिल सकता है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य पारंपरिक एरोनॉटिकल चार्जेस (जो एयरलाइंस और यात्रियों से वसूले जाते हैं) पर निर्भरता कम करना है। कंपनी के CEO अरुण बंसल के मुताबिक, कंपनी अब रिटेल, फूड एंड बेवरेज और एडवरटाइजिंग जैसे नॉन-एरोनॉटिकल सोर्सेज से 70% कमाई करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस मॉडल का मकसद रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का इस्तेमाल कर एरोनॉटिकल लागत को कम करना है।
$10 बिलियन का भारी-भरकम निवेश
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी $10 बिलियन का कैपिटल स्पेंडिंग प्रोग्राम चला रही है। इस निवेश का इस्तेमाल अहमदाबाद, जयपुर और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स के विस्तार में किया जा रहा है। हाल ही में कंपनी ने अपने एयरपोर्ट्स बिजनेस में $1 बिलियन की हिस्सेदारी बेचकर अपनी फाइनेंशियल स्थिति और मजबूत की है। कंपनी का उद्देश्य भारत के एयरपोर्ट्स को दुबई और दोहा जैसे इंटरनेशनल हब के मुकाबले तैयार करना है।
Navi Mumbai एयरपोर्ट की बड़ी भूमिका
ग्रुप के लिए नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अगस्त में यहां फ्रीटर ऑपरेशंस शुरू हो चुके हैं और 15 अक्टूबर तक मुंबई एयरपोर्ट से सारा कार्गो ट्रैफिक यहां शिफ्ट करने की योजना है। कंपनी का लक्ष्य मुंबई के सैचुरेटेड एयरपोर्ट से 30% इंटरनेशनल फ्लाइट्स को नवी मुंबई शिफ्ट करने का है। साथ ही, अमेरिकी इमिग्रेशन प्री-क्लियरेंस की संभावनाओं पर भी गौर किया जा रहा है।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि योजना बड़ी है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना चुनौतीपूर्ण है। एयरलाइंस ने नई लोकेशन पर रूट्स शिफ्ट करने को लेकर सावधानी बरती है, क्योंकि उन्हें कनेक्टिविटी और पैसेंजर डिमांड की चिंता है। साथ ही, एयरपोर्ट सेक्टर में AERA (Airports Economic Regulatory Authority) की सख्त निगरानी रहती है, जो फीस तय करती है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि एयरलाइंस का ट्रांजिशन कितनी तेजी से होता है और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कितनी देरी होती है।
