Adani Airports के CEO अरुण बंसल ने देश में तीसरी बड़ी एयरलाइन की जरूरत पर जोर दिया है। कंपनी ने साफ किया है कि वे खुद एयरलाइन क्षेत्र में नहीं उतरेंगे, बल्कि अपना पूरा ध्यान **$11 अरब** के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर लगा रहे हैं, ताकि क्षमता को तीन गुना किया जा सके।
दिल्ली में आयोजित 'एविएशन इंडिया 2026' कॉन्फ्रेंस में Adani Airports के CEO अरुण बंसल ने भारतीय एविएशन सेक्टर की तस्वीर बदलने की बात कही। बंसल का मानना है कि इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) के दबदबे वाले मार्केट में एक तीसरी बड़ी एयरलाइन की सख्त जरूरत है। इससे विदेशी हब पर निर्भरता कम होगी और सीधा अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
एयरलाइन बिजनेस पर कंपनी का स्टैंड
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि अडानी ग्रुप एयरलाइन के बिजनेस में आने की कोई योजना नहीं बना रहा है। बंसल ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना उनके मुख्य ग्राहकों के साथ हितों का टकराव (conflict of interest) पैदा करेगा। कंपनी अब केवल अपने कोर बिजनेस, यानी एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान देगी।
$11 अरब का मेगा एक्सपेंशन
कंपनी अगले 7 साल में $10 अरब से $11 अरब का भारी-भरकम कैपेक्स (Capex) करने जा रही है। इसका मुख्य लक्ष्य अगले दशक तक सालाना पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता को 10 करोड़ से बढ़ाकर 30 करोड़ करना है। इसमें नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का फेज-2 और मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का रीडेवलपमेंट प्रमुख प्रोजेक्ट्स हैं।
बिजनेस मॉडल और जोखिम
एयरपोर्ट ऑपरेटर के तौर पर अडानी ग्रुप का मुनाफा पूरी तरह पैसेंजर वॉल्यूम पर निर्भर है। अधिक एयरलाइंस मतलब ज्यादा फ्लाइट्स और ज्यादा फुटफॉल, जो रिटेल और डाइनिंग रेवेन्यू को भी बढ़ाएगा। हालांकि, इतने बड़े निवेश के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। भारी कर्ज (Debt) का दबाव और प्रोजेक्ट में देरी या कॉस्ट ओवररन जैसे जोखिमों पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए।
