अगस्त से अबू धाबी के ज़ायेद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Zayed International Airport) से भारत के लिए सीधी उड़ानों का नेटवर्क 17 शहरों से बढ़कर 22 शहरों तक पहुँच जाएगा। यह कदम बढ़ती यात्रा मांग को भुनाने के लिए उठाया जा रहा है, क्योंकि भारतीय यात्री अब एयरपोर्ट के कुल ट्रैफिक का **24%** हिस्सा हैं।
भारत से उड़ानों का बड़ा विस्तार
अबू धाबी का ज़ायेद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Zayed International Airport) भारत के लिए अपनी कनेक्टिविटी को और मजबूत करने जा रहा है। अगस्त से, एयरपोर्ट 17 के बजाय भारत के 22 शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करेगा। यह बड़ा कदम दोनों क्षेत्रों के बीच यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर उठाया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, भारत से आने वाले यात्रियों की संख्या हर साल 20% से ज़्यादा की दर से बढ़ रही है।
भारतीय एयरलाइंस के लिए मौके
इस विस्तार से भारत की प्रमुख एयरलाइंस को मध्य पूर्व में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के अच्छे मौके मिलेंगे। फिलहाल, IndiGo, Akasa Air और टाटा ग्रुप की Air India Express जैसी भारतीय एयरलाइंस अबू धाबी के लिए उड़ानें संचालित करती हैं। Air India Express खास तौर पर सक्रिय रही है, जिसने हाल ही में नवी मुंबई, इंदौर और लखनऊ से नई सेवाएं शुरू की हैं, और गुवाहाटी को भी अपने शेड्यूल में शामिल करने की योजना है। इन एयरलाइंस के लिए, अधिक ट्रैफिक राइट्स (Traffic Rights) का मिलना, यानी देशों के बीच उड़ानें संचालित करने की सरकारी अनुमति, रूट ग्रोथ को बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।
यात्रियों की मांग और पर्यटन
भारत, अबू धाबी के एविएशन सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण बाज़ार बना हुआ है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय यात्री ज़ायेद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कुल ट्रैफिक का लगभग 24% हैं, जो हर साल करीब 70 लाख यात्रियों के बराबर है। सबसे खास बात यह है कि इनमें से लगभग 50 लाख यात्री 'पॉइंट-टू-पॉइंट' यात्री हैं, यानी वे सीधे अबू धाबी घूमने आते हैं, न कि किसी दूसरे देश के लिए ट्रांजिट करते हैं। डायरेक्ट टूरिज्म और बिज़नेस ट्रैवल की यह उच्च मांग क्षमता बढ़ाने और रूट के विकल्प जोड़ने की मुख्य वजह है।
ऑपरेशनल स्थिति और आगे की राह
जून के अंत तक, ज़ायेद इंटरनेशनल एयरपोर्ट हर दिन औसतन 93,000 यात्रियों और लगभग 500 दैनिक उड़ानों का प्रबंधन कर रहा था। एयरपोर्ट का लक्ष्य एक प्रमुख ग्लोबल ट्रैवल हब बनना है, और भारतीय बाज़ार के साथ संबंधों को मजबूत करना इसके लिए केंद्रीय है। निवेशक और इंडस्ट्री के जानकारों की नज़र इस बात पर रहेगी कि यह अतिरिक्त क्षमता, इन रूट्स पर उड़ान भरने वाली एयरलाइंस के लोड फैक्टर (Load Factor) यानी भरी गई सीटों के प्रतिशत को कैसे प्रभावित करती है। मुख्य सवाल यह होगा कि क्या 22 शहरों से सीटों की बढ़ी हुई सप्लाई, मुनाफे वाले मूल्य स्तर को बनाए रख पाएगी, या फिर क्षमता बढ़ने से भारत-मध्य पूर्व एविएशन कॉरिडोर में किराये पर दबाव पड़ेगा।
