पश्चिम एशिया संकट से ATF की कीमतों में भारी उछाल
भारत का एविएशन सेक्टर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल का सामना कर रहा है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी, दिल्ली में ATF की कीमत 115% बढ़कर ₹2,07,341.22 प्रति किलोलीटर हो गई है। इस तीखे उछाल का सीधा संबंध पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से है, जिसने ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों को $105-$119 प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है। हॉरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की सप्लाई में दिक्कतें एयरलाइन्स के लिए लागत में भारी बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं। यह उछाल फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद आई है, जिससे पहले ही मार्च में कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी गई थी।
ऊंची ईंधन लागत से एयरलाइन्स के मुनाफे पर दबाव, खाई चौड़ी
एयरलाइन्स के लिए, जहां ATF परिचालन लागत (Operating Costs) का 30-40% होता है, कीमतों में इस उछाल का मतलब है कि उनके मुनाफे पर गंभीर दबाव आने वाला है। उद्योग-व्यापी घाटे का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए ₹17,000-₹18,000 करोड़ तक लगाया गया है, जिसके चलते रेटिंग एजेंसी ICRA ने सेक्टर के लिए 'Negative' आउटलुक जारी किया है। मार्केट लीडर IndiGo (InterGlobe Aviation), जिसके पास बाजार का 62-65% हिस्सा है, अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और कुशल संचालन के चलते कुछ हद तक संभल सकती है। हालांकि, IndiGo ने भी फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) लगाना शुरू कर दिया है और इस पर विचार कर रही है, जबकि उसके P/E रेश्यो 34.43 से 52.96 के बीच हैं। वहीं, SpiceJet की हालत बेहद खराब है। उसका P/E रेश्यो -0.91 से -2.9 के बीच है और बिक्री में ग्रोथ कमजोर है। कंपनी ने फ्यूल हेजिंग (Fuel Hedging) केवल 15% तक की है, जो ग्लोबल औसत 60-80% से काफी कम है। इससे वह कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील हो गई है, जो उसकी मुश्किलों को और बढ़ा रहा है। उम्मीद है कि इस अंतर से भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का फासला और बढ़ेगा।
सरकार की राहत की तलाश के बीच यात्रियों को महंगे किराए का सामना
फरवरी के अंत से ATF की कीमतों में लगभग दोगुना बढ़ोतरी के बाद, एयरलाइन्स को अपनी लागत वसूलने के तरीके खोजने होंगे। भारतीय एयरलाइन्स ऐतिहासिक रूप से कीमत वृद्धि को सीधे तौर पर सोख लेती आई हैं, लेकिन वर्तमान वृद्धि का पैमाना उन्हें इस रणनीति को बदलने पर मजबूर कर रहा है। Air India पहले ही फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर चुकी है, और IndiGo और SpiceJet जैसी कंपनियां भी इसी तरह के कदम उठाने पर विचार कर रही हैं। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि एयरलाइन्स इन खर्चों का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डालकर घरेलू हवाई किराए में 5-10% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। सरकार भी यात्रियों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव से वाकिफ है और समाधान तलाश रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने राज्य सरकारों से ATF पर लगने वाले VAT (Value Added Tax) को कम करने का आग्रह किया है, जो राज्यों में काफी अलग-अलग है (दिल्ली में 25% से लेकर उत्तर प्रदेश में महज 1% तक)। तेल कंपनियों के साथ ATF की प्राइसिंग मॉडल को संशोधित करने पर भी चर्चा चल रही है, जिसमें 'क्रैक स्प्रेड' (Crack Spread) कंपोनेंट को कैप करने का लक्ष्य है ताकि लागत $10-$22 प्रति बैरल के दायरे में रहे।
एविएशन से परे व्यापक आर्थिक प्रभाव
ईंधन की बढ़ती लागत का असर सिर्फ एविएशन सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि भारत की महंगाई (Inflation) को सीधे तौर पर प्रभावित करती है; कच्चे तेल में हर $10 प्रति बैरल की वृद्धि CPI महंगाई को 0.55-0.60 प्रतिशत अंक और WPI को 0.80-1.00 प्रतिशत अंक बढ़ा सकती है। महंगाई बढ़ने से उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता कम होती है, जिससे यात्रा और अन्य गैर-जरूरी चीजों पर खर्च घट सकता है। इसके अलावा, मजबूत डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया, उच्च आयात लागत के कारण एयरलाइन्स के लिए डॉलर-आधारित भुगतान की लागत को बढ़ाता है। इससे मुनाफे पर दबाव बढ़ता है और हर $10 कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर GDP ग्रोथ 0.25-0.27 प्रतिशत अंक तक धीमी हो सकती है। वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति और ऊर्जा कीमतों पर इसका सीधा प्रभाव दिखाता है कि भारत की आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था और एविएशन सेक्टर किस हद तक कमजोर हैं।