Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने केदारनाथ घाटी में उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टर पायलटों के लिए **50 घंटे** की अनिवार्य 'हिल-फ्लाइंग' ट्रेनिंग के नियम लागू किए हैं। यह कदम 2025 में हुए एक घातक हादसे के बाद उठाया गया है, जिससे ऑपरेटरों की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है।
सुरक्षा के लिए सख्त मानक
Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने केदारनाथ घाटी में हवाई सुरक्षा को लेकर बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला जून 2025 में हुए Aryan Aviation के Bell 407 हेलीकॉप्टर क्रैश की जांच के बाद लिया गया है, जिसमें 7 लोगों की जान गई थी। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि खराब मौसम के बीच पायलट का दिशा से भटकना हादसे की मुख्य वजह थी।
नई गाइडलाइंस क्या हैं?
अब हर उस पायलट को, जो इन पहाड़ी रास्तों पर उड़ान भरेगा, एक अनुभवी इंस्ट्रक्टर की देखरेख में कम से कम 50 घंटे की ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसके अलावा, AAIB ने उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी को सितारपुर कंट्रोल सेंटर पर सभी रेडियो कम्युनिकेशन की वॉइस लॉगिंग अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। अब हर बातचीत का रिकॉर्ड रहेगा, जिससे भविष्य में सेफ्टी ऑडिट और जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
बिजनेस और निवेश पर असर
इस फैसले से हेली-टूरिज्म और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए कंप्लायंस लागत बढ़ सकती है। चार धाम सेक्टर में ऑपरेट करने वाली कंपनियों को अब पायलट ट्रेनिंग और सिस्टम अपग्रेड पर ज्यादा खर्च करना होगा। पीक सीजन के दौरान अगर कंपनियां तय समय में अपने स्टाफ को सर्टिफाई नहीं कर पाती हैं, तो सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि 2015 से लेकर अब तक चार धाम सेक्टर में 8 बड़े हादसे और 1 गंभीर घटना दर्ज की गई है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ये कड़े नियम लंबी अवधि में सेक्टर के रिस्क प्रोफाइल को स्थिर करने के लिए जरूरी हैं, हालांकि शुरुआत में ऑपरेटरों के लिए इसे अपनाना एक बड़ी चुनौती होगी।
