Airports Authority of India (AAI) देश के एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने जा रही है। **₹3,490 करोड़** के इस बड़े निवेश का लक्ष्य साल 2047 तक **130 करोड़** यात्रियों के दबाव को संभालना और विमानों की ईंधन लागत को कम करना है।
बड़े स्तर पर हो रहा आधुनिकीकरण
Airports Authority of India (AAI) अब अपनी पूरी एयर नेविगेशन और ट्रैफिक मैनेजमेंट व्यवस्था को बदलने की तैयारी में है। यह कदम ₹3,490 करोड़ के विशाल फंड के साथ उठाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की हवाई यातायात क्षमता को बढ़ाना है, ताकि 2047 तक देश की सालाना यात्री क्षमता को वर्तमान 24 करोड़ से बढ़ाकर 130 करोड़ तक ले जाया जा सके।
ऑटोमेशन और मैनपावर पर जोर
इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा, यानी ₹1,532 करोड़, सीधे तौर पर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट के ऑटोमेशन पर खर्च किया जाएगा। हालांकि, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने साफ किया है कि तकनीक कितनी भी उन्नत हो जाए, सुरक्षा के लिए मानवीय निगरानी सबसे जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले ही 840 नए एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की भर्ती कर ली है ताकि भविष्य में कोई बॉटलनेक (रुकावट) न आए।
एयरलाइन्स के लिए क्यों है यह जरूरी?
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि बेहतर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट का सीधा असर एयरलाइन्स की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मुनाफे पर पड़ता है। बेहतर एयरस्पेस मैनेजमेंट से विमान हवा में कम समय बिताएंगे, जिससे ईंधन की खपत कम होगी। मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2020 से लागू की गई 'फ्लेक्सिबल एयरस्पेस मैनेजमेंट' रणनीति से अब तक ₹895 करोड़ की बचत हुई है और 1.95 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ है।
निवेशकों के लिए आगे क्या है?
वर्तमान में रोजाना घरेलू उड़ानों की संख्या 5,000 और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 1,000 के पार पहुंच गई हैं। ऐसे में अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेशन कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है और कंपनी के लॉन्ग-टर्म मार्जिन को कैसे प्रभावित करता है।
