AAI ने खोले 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग स्लॉट, पायलटों की कमी को पूरा करने की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
AAI ने खोले 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग स्लॉट, पायलटों की कमी को पूरा करने की तैयारी

एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने 7 हवाई अड्डों पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग स्लॉट आवंटित किए हैं। इसका मकसद आने वाले समय में पायलटों की भारी कमी को दूर करना है। इस कदम से हर साल 1,500 पेशेवर पायलट ट्रेन हो सकेंगे, जिससे विदेशी ट्रेनिंग सेंटर्स पर निर्भरता कम होगी।

ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्लॉट आवंटित कर दिए हैं। यह भारतीय सिविल एविएशन सेक्टर में प्रशिक्षित पायलटों की सप्लाई और बढ़ती मांग के बीच के अंतर को पाटने की एक बड़ी कोशिश है। ये नई सुविधाएं 7 रीजनल एयरपोर्ट्स पर स्थापित की जाएंगी।

ट्रेनिंग क्षमता में बढ़ोतरी

इस प्रोजेक्ट में शुरुआत में 60 से 70 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट शामिल होंगे, और बाद में इन्हें बढ़ाकर 110 से 120 एयरक्राफ्ट और मॉडर्न सिमुलेटर तक ले जाने की योजना है। पूरी तरह से चालू होने पर, ये सुविधाएं हर साल लगभग 1,500 एविएशन प्रोफेशनल्स को ट्रेन कर सकेंगी। यह देश भर में पहले से चल रहे 41 DGCA-अप्रूव्ड फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन्स के नेटवर्क को और मजबूत करेगा।

घरेलू ग्रोथ और लागत में कमी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, अगले 10 सालों में भारतीय एयरलाइंस को 30,000 से 31,800 अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी। यह मांग डोमेस्टिक एयरलाइंस की बेड़े के विस्तार योजनाओं और रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत नए एयरपोर्ट के विकास से प्रेरित है। घरेलू ट्रेनिंग क्षमता बढ़ाकर, सरकार का लक्ष्य ट्रेनिंग पर होने वाले खर्च को देश के अंदर ही रखना है, न कि विदेशी संस्थानों में भेजना, जहां से कई भारतीय छात्र अभी पायलट लाइसेंस प्राप्त करते हैं।

कमर्शियल पायलट लाइसेंसिंग में ट्रेंड

घरेलू ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर यह फोकस हाल के वर्षों में जारी किए गए लाइसेंसों की संख्या में लगातार वृद्धि के अनुरूप है। 2018 में जहां 640 कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जारी हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,628 हो गई। जैसे-जैसे एविएशन इंडस्ट्री रिकवर कर रही है और विस्तार कर रही है, इन नए ट्रेनिंग सेंटरों की सफल शुरुआत और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर नजर रहेगी।।

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